संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। देखरेख के अभाव में शहर के पार्कों की दशा खराब है। झूले और ओपन जिम के उपकरण टूट गए हैं। पार्क के बीच गड्ढे बने हैं जिसमें पानी भरा है। नियमित सफाई नहीं होने के कूड़े के ढेर लगे हैं। शहर के लोगों ने पार्कों की दशा सुधारने की मांग कई बार की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब लोगों ने विधानसभा चुनाव में इसे मुख्य मुद्दा बना लिया है।
अच्छी सेहत के लिए बुजुर्ग पुरुष, महिलाएं और बच्चे सुबह सैर करने के पार्क में जाते हैं। शहर के पार्कों की दशा इस कदर खराब है कि लोगों ने पार्कों में जाना बंद कर दिया है। इसकी जगह लोग सड़क पर टहलते नजर आते हैं। शहर में स्थित राव तुलाराम पार्क, नेहरू पार्क, सुभाष चंद्र बोस पार्क, रेजांगला पार्क व ब्रास मार्केट, वीर सावरकर पार्क सहित अन्य सेक्टरों में स्थित पार्कों की दशा दयनीय है।
कहीं सफाई नहीं होने से कूड़े के ढेर लगे हैं तो कहीं देखरेख के अभाव में झाड़ियां उग आई हैं। नियमित सफाई नहीं होने से जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। झूले और ओपन जिम के उपकरण भी टूट गए हैं। ऐसे में इन पार्कों में टहलना तो दूर कुछ समय बैठना भी मुश्किल होता है। वर्तमान में शहर से पार्कों की खराब दशा बड़ा मुद्दा बना है। लोग पार्कों की दशा सुधारने के लिए लगातार मांग करते रहे हैं, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी।
पार्कों में रखे डस्टबिनों का कचरा भी नहीं फेंका जाता है। देखरेख नहीं होने के कारण घास खराब हो गई है। पार्कों में लाखों की लागत से लगे झूले और ओपन जिम मशीनें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। पार्कों की चारदीवारी टूट गई है जिससे उसमें गोवंश घुस जाते हैं। इससे पार्क में बैठे लोगों को परेशानी होती है। पार्क में गोवंश कचरे को फैला देते हैं जिससे गंदगी फैल जाती है।
कई पार्कों में पेयजल और शौचालय की व्यवस्था नहीं
नेहरू पार्क, राव तुलाराम पार्क, नेताजी सुभाष पार्क, ब्रास मार्केट पार्क सहित सेक्टर-1, सेक्टर-3 व सेक्टर-4 के पार्कों में ओपन जिम की मशीनें व झूले टूट चुके हैं। पार्कों की सफाई के लिए न सफाईकर्मी हैं और न ही कोई चौकीदार। पार्कों में प्रतिदिन लोग सुबह व शाम टहलने जाते हैं लेकिन देखरेख की कमी से सभी पार्क खुद बीमार पड़ गए हैं। कई पार्कों में पेयजल और शौचालय की व्यवस्था नहीं है।
सुबह और शाम लोग सैर करने के लिए पार्क में जाते हैं। पार्कों की दशा इतनी खराब है कि जाने का भी मन नहीं करता है। इस पर जरूर ध्यान दिया जाना चाहिए। -कुलदीप, शहरवासी।
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अगर बच्चे पार्क में जाते हैं तो उनका वैसे ही मन नहीं लगता है क्योंकि झूले सभी टूटे हुए हैं। झूले भी सही करवाए जाएं। साथ ही शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए। -हरीश, शहरवासी।
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शहर के पार्कों की दशा खराब है। मरम्मत की आवश्यकता है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। लोगों को काफी परेशानी होती है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। -प्रियंका यादव, ब्रांड एंबेसडर, स्वच्छ भारत मिशन
आचार संहिता लगने की वजह से कई कार्य नहीं हो पा रहा है। पार्कों की दशा सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा है। आचार संहिता हटते ही पार्कों की दशा सुधारी जाएगी।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद
पार्कों की दशा सुधारने के लिए बजट जारी होता है। इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरती है। इस पर नगर परिषद ने कभी ध्यान भी नहीं दिया है। हमारी सरकार बनेगी तो पार्कों को विशेष रूप से सजाया जाएगा। साथ ही सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी।-चिरंजीव राव, प्रत्याशी, रेवाड़ी विधानसभा
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