रोहतक। चैत्र नवरात्र के सप्तमी पर सोमवार को शहरभर में मंदिरों में मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना की। दिनभर मंदिरों मां के जयकारे गूंजे। र्गा भवन मंदिर, माता दरवाजा चौक स्थित शीतला माता मंदिर, बस स्टैंड स्थित शिव मंदिर, श्रीराम पार्क स्थित हनुमान मंदिर, माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर आदि में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिरों में दुर्गा सप्तशी का पाठ लगातार चल रहा है। शास्त्रों में माता कालरात्रि को शुभंकरी, महायोगीश्वरी और महायोगिनी भी कहा गया है।
दुष्टों का नाश करतीं हैं मां कालरात्रि
साध्वी मानेश्वरी ने प्रवचन में कहा कि मां दुर्गा के कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयानक है, मगर वह सदैव अपने भक्तों को शुभ फल प्रदान करती हैं। इनका स्मरण करने से दानव, भूत-प्रेत, राक्षस, दैत्य आदि डरकर भाग जाते हैं। कालरात्रि रूप का अवतार असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए हुआ था। ये दुष्टों का नाश करने करके ग्रह बाधाओं को भी दूर करती हैं। इनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण का है। काले रंग के कारण उनको कालरात्रि कहा गया है। चार भुजाओं वाली मां कालरात्रि दोनों बाएं हाथों में कटार और लोहे का कांटा धारण करती हैं।
-अष्टमी पर आज होगी मां गौरी की पूजा
देवी दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। मंगलवार को अष्टमी पर मां की उपासना की जाती है। इन्हें मां पार्वती(अन्नपूर्णा) के रूप में भी पूजा जाता है। इनके गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से की गई है और इनकी आयु आठ वर्ष की मानी हुई है। इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। मान्यता के अनुसार अपनी कठिन तपस्या से मां ने गौर वर्ण प्राप्त किया था। तभी से इन्हें उज्जवला स्वरूपा महागौरी, धन ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी त्रैलोक्य पूज्य मंगला, शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया।