रोहतक। एमडीयू में सोमवार को सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज की ओर से नेशनल सिंपोजियम का आयोजन किया गया। इसका विषय नर्चरिंग लीडरशिप ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटी फॉर एन इंक्लूसिव एंड सस्टेनेबल फ्यूचर रहा। भारतीय पुनर्वास परिषद की अध्यक्ष डॉ. शरणजीत कौर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज के सचिव राजेश अग्रवाल ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। आईआईटी रुड़की की डाॅ. सोनल ने की-नोट स्पीकर के रूप में अपनी बात रखी। राजेश अग्रवाल ने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज में बराबरी का स्थान दिलाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जरूरी है। उन्होंने कहा कि एसिस्टेड टेक्नोलॉजी से दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। अग्रवाल ने बताया भारत सरकार ने भारतीय सांकेतिक भाषा को प्रोत्साहन देते हुए डीटीएच चैनल भी प्रारंभ किया है। चौ. बंसीलाल यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. दीप्ति धर्माणी व एएस नारायणन बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। डॉ. शरणजीत कौर ने कहा कि दिव्यांगजनों को समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने में महिलाओं की महती भूमिका है। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज की स्थापना कर सांकेतिक भाषा शिक्षण, प्रशिक्षण के जरिए मूक-बधिर जन का सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। डाॅ. सोनल आत्रेय ने कहा कि न केवल क्लास रूम को इनक्लूसिव बनाया जाए, बल्कि संपूर्ण, स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी कैंपस को दिव्यांगजन के लिए एक्सेसिबल तथा इनक्लूसिव बनाए जाने की जरूरत है। प्रो. आशीष दहिया ने डैफेटेरिया प्रोजेक्ट के जरिए मूक-बधिर जन के सशक्तिकरण की पहल के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर डैफेटेरिया की वेबसाइट को लांच किया गया। मनोविज्ञान विभाग की छात्रा आरती ने कविता प्रस्तुत कर दिव्यांगजन की मनोदशा का वर्णन किया।