रोहतक। हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए पीजीआईएमएस सोमवार को डॉक्टरों की टीम गठित करेगा, जो संस्थान में जब्त ऑर्थो इम्प्लांट की लिस्ट बना कर तैयार करेगा और लिस्ट और सामान पुलिस को सौंपेगा। इसके बाद पुलिस प्रशासन के पास चार सप्ताह का समय होगा, जो जांच कर बताएगी कि यह सामान किसका है।
पांच साल बाद रोहतक पुलिस फिर जब्त ऑर्थो इम्प्लांट को अपने अधिकार में लेगी। क्योंकि जब इस सामान को जब्त किया गया तो तत्कालीन निदेशक डॉ. नित्यानंद ने पुलिस को जब्त सामान कब्जे में लेने को कहा था, लेकिन पुलिस ने इसे नहीं लिया। इसके बाद पुलिस कप्तान के साथ जीएसटी को पत्र लिखा गया, लेकिन सामान संस्थान के कब्जे में ही रहा। अब हाईकोर्ट के आदेश पर फिर डॉक्टरों की टीम गठित होने जा रही है।
पीजीआईएमएस में तत्कालीन निदेशक के निर्देशों पर सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र सरोहा ने ऑर्थो के इम्प्लांट तीन अलग-अलग दिन जब्त किए थे। अब इस पर फिर जांच होगी। जैसे ही डॉक्टर पुलिस को सामान सौंपते हैं, फिर एसएचओ पीजीआईएमएस के नेतृत्व में यह जांच शुरू होगी।
हाईकोर्ट के जज विनोद भारद्वाज ने 20 जुलाई को पीजीआईएमएस के बहु विवादित ऑर्थो इम्प्लांट मामले में अपना फैसला सुनाया था। इस मामले में सेवानिवृत जज आरपी भसीन, पुलिस कप्तान जश्नदीप रंधावा, डीएसपी जमाल खान, सीनियर आईएएस अधिकारी साकेत कुमार जांच कर चुके हैं।