रोहतक। दादा लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन व दृश्य कला विश्वविद्यालय एक बार फिर चर्चा में है। इस बार विवि के फैकल्टी ऑफ फिल्म व टेलीविजन के चौथे सेमेस्टर एक्टिंग, कैमरा, डायरेक्शन, एडिटिंग, ऑडियोग्राफी (बैच 2021) के विद्यार्थियों को ज्यूरी में जाने से रोकने का मामला बताया जा रहा है। इस बारे में विद्यार्थियों ने विवि प्रशासन पर ज्यूरी से वंचित रखने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में संबंधित विभाग के अधिकारी से संपर्क किया गया तो उनसे बात नहीं हो पाई।
विद्यार्थियों का कहना है कि सेमेस्टर के अंत की ज्यूरी स्टूडियो फिल्म 12 से 15 मार्च सुबह 11 से 5 बजे तय की गई थी। मंगलवार को विद्यार्थी सुबह 10 बजे ज्यूरी के लिए पहुंचे तो उन्हें ज्यूरी में शामिल नहीं होने दिया गया। इस संबंध में कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, डीन एकेडमिक, फैकल्टी कोऑर्डिनेटर एफएफटीवी, एकेडमिक कोऑर्डिनेटर एफएफटीवी को जानकारी दी गई। इसके बावजूद कोई संज्ञान नहीं लिया गया। मौखिक तौर पर विद्यार्थियों से कहा गया कि केवल फिल्म से संबंधित चार विद्यार्थी ही ज्यूरी में शामिल हो सकते हैं।
विद्यार्थियों की ज्यूरी सीमित करना चिंताजनक
सुपवा स्टूडेंट्स यूनिटी के सहसंयोजक यशवंत और छात्र शिवम का कहना है कि विश्वविद्यालय के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि विद्यार्थियों की ज्यूरी को सीमित किया जाए। विश्वविद्यालय की ओर से उठाया गया यह कदम चिंताजनक है। विद्यार्थी केवल ज्यूरी के लिए फिल्म नहीं बनाता है। ज्यूरी के बाद सभी मिलकर एक दूसरे के काम पर चर्चा करते हैं। इससे बेहतर से बेहतर फिल्म बनाने की प्रेरणा व इच्छाशक्ति मिलती है। काम में सुधार व गुणवत्ता आती है। विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इससे हरियाणा में कला की धरोहर माने जाने वाले संस्थान का पतन हो रहा है। सुपवा प्रशासन नए-नए नियम निर्धारित कर रहा है। इससे विद्यार्थी आहत हैं।