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वीरांगना को नमन: शहीद पति की याद में सुलेखा ने बनवाया स्मारक, चौकीदार को खुद दे रहीं वेतन

Tue, 26 Jul 2022 12:50 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक (हरियाणा)

सार

मोखरा गांव निवासी सुरेश मलिक 23 साल की उम्र में कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए थे। पति की शहादत के दो माह बाद बेटी का जन्म हुआ था।
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कारगिल युद्ध में शहीद नायक सुरेश कुमार मलिक की प्रतिमा और परिवार के साथ फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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कारगिल युद्ध में हरियाणा के रोहतक जिले के गांव मोखरा के बेटे नायक सुरेश कुमार मलिक 10 जुलाई 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। शहादत के समय उनकी उम्र 32 वर्ष थी। वे राजपूत राइफल्स में नायक पद पर कार्यरत थे। पति की शहादत के बाद पत्नी सुलेखा ने पंचायत से मिली जमीन पर पांच लाख खर्च कर स्मारक बनवाया और इसकी देखभाल करने वाले चौकीदार को खुद ही वेतन दे रहीं हैं।

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23 वर्ष बाद सुरेश कुमार की शहादत का जिक्र करते ही पत्नी सुलेखा को उनसे जुड़ी सभी यादें ताजा हो गईं। उन्होंने बताया कि वह पति सुरेश के सही सलामत घर लौटने का इंतजार कर रही थीं। वह उम्मीद लगाए बैठी थी कि जब वह युद्ध जीतकर घर आएंगे तो उनको घर में नए मेहमान के आगमन की खुशखबरी मिलेगी। लेकिन किस्मत को कुछ अलग ही मंजूर था। बेटी सुरक्षा के जन्म से दो महीने पहले 10 जुलाई, 1999 को वह देश की सुरक्षा करते-करते शहीद हो गए। अब उनके सामने बेटी के पालन-पोषण की बड़ी जिम्मेदारी थी। 

बेटी सुरक्षा वर्तमान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही है। पत्नी और बेटी को सुरेश की शहादत पर गर्व है। जिला सैनिक व अर्ध सैनिक वेलफेयर ऑफिस, रोहतक के आंकड़ों के अनुसार कारगिल युद्ध में जिले के नौ जवान शहीद हुए थे।
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पत्नी ने बेटी का नाम सुरक्षा रखा 
नायक सुरेश की शहादत के दो महीने बाद बेटी का जन्म हुआ था। शहीद की पत्नी सुलेखा ने बताया कि उनके पति ने देश की सुरक्षा में प्राण न्योछावर किए तो बेटी का नाम सुरक्षा रख दिया। वर्तमान में बेटी सुरक्षा रोहतक स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में एमकॉम की पढ़ाई कर रही है।

पंचायत ने स्मारक बनाने के लिए दी थी जमीन
पति के शहीद होने के बाद गांव की पंचायत ने बस स्टैंड के पास स्मारक बनाने के लिए कुछ जमीन दी थी। वर्ष 2000 में स्वयं पांच लाख खर्च कर स्मारक का निर्माण किया था। स्मारक में बने पार्क में पौधे लगाए गए थे। इसके रख-रखाव के लिए एक चौकीदार नियुक्त कर रखा है। शहीद की पत्नी सुलेखा चौकीदार को प्रति माह 1500 रुपये स्वयं भुगतान करती हैं। 

बेटे की दिमाग की नस फटने से हो गई थी मौत 
शहीद की पत्नी ने बताया कि उनकी शादी 1990 में हुई थी। शादी के दो वर्ष बाद बेटे सुमित का जन्म हुआ था। बेटे की अचानक सिर की नस फट गई जिस कारण उसकी मौत हो गई थी। परिवार में सिर्फ बेटी सुरक्षा ही है। 

आईटीआई में हैं कार्यरत
शहीदों के परिवारों को सरकार ने विशेष सुविधाएं उपलब्ध करवाई थी। शहीद सुरेश की पत्नी सुलेखा को शैक्षणिक आधार पर वर्ष 2000 में आईटीआई में नौकरी मिली। 2004 तक वह महम आईटीआई में रहीं। उसके बाद उनका ट्रांसफर गुरुग्राम आईटीआई में हुआ। अक्टूबर 2018 से वे मदीना आईटीआई में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं और रोहतक के कृपाल नगर में किराए के मकान में रह रही हैं।

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