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Rohtak News: शहर के मुख्य चौराहे पर लगे महात्मा ज्याेतिबा फुले की मूर्ति

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रोहतक। समाज को दिशा देने व महिला शिक्षा की अलख जगाने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्री बाई फुले की प्रतिमा शहर के मुख्य चौराहे पर लगाई जाए। विश्वविद्यालय में भी इनके नाम से कोई चेयर शुरू कर इन पर शोध कार्य किया जाए। यह कहना है सैनी शिक्षण संस्था के पदाधिकारियों व समाज के प्रबुद्ध लोगों का।
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उन्होंने शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में हुए संवाद कार्यक्रम में समाज को बेहतर बनने व विद्यार्थियों को नई राह दिखाने को लेकर अपनी बात रखी। बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ संस्कार व संस्कृति से भी जोड़ कर संपूर्ण व सुयोग्य नागरिक बनाने पर जोर दिया गया। इस चर्चा में श्याम कटारिया, ओमप्रकाश सैनी, बुधराम सैनी, डॉ. करतार सिंह सैनी, शीशपाल, महेंद्र सैनी, राजेश सैनी, जोरा सिंह शामिल रहे। सभी ने शहर में प्रवेश के लिए बड़ा सूचना पट्ट लगाने की आवश्यकता जताई।


समाज तेजी से बदल रहा है। एकल परिवार बढ़ रहे हैं। सामूहिक परिवार नाम मात्र के रह गए हैं। इस कारण नई पीढ़ी चाची, ताई, मौसी को भूलने लगी है। रिश्तों से अनजान होते जा रहे हैं। परिवार में एक ही बच्चा होने से उन्हें दुलार पूरा मिलता है। डांट नहीं। इस कारण उन्हें कोई कुछ भी करने से रोके-टोके तो बर्दाश्त नहीं होता है। यहीं से उनका स्वभाव बदलने लगता है और आगे चल कर विकट परिस्थितियां पैदा करता है।
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धर्म सिंह दहिया, प्रधान, सैनी शिक्षण संस्था।



हमारी पुरानी परंपराएं काफी मजबूत हैं। उनमें शिक्षा के साथ परिवार व समाज को आपस में जोड़ने की क्षमता है। इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। मोबाइल से हम आपस में ही दूर होते जा रहे हैं। बच्चे पढ़ाई भी अपने दिमाग से नहीं कर रहे हैं। वे जमा या घटा भी केलकुलेटर से करते हैं। इस कारण उनकी तार्किक शक्ति प्रभावित होने लगी है। सरकारी नीतियों को भी बेहतर ढंग से लागू करने की जरूरत है।

बलजीत सिंह सैनी, पूर्व प्रधान, सैनी शिक्षण संस्था।



शिक्षण संस्थाओं में बच्चों को शिक्षा के साथ बेहतर भविष्य संबंधी गाइडेंस भी मिले। इसके अभाव में अनेक बच्चे अपना भविष्य संवारने से वंचित रह जाते हैं। सही समय पर सही मार्गदर्शन से इनका भविष्य संवर सकता है। इससे बच्चों को लाभ मिलेगा। सैनी स्कूल रोड पर दोनों ओर सैनी शिक्षण संस्थान का बोर्ड लगाना चाहिए। संस्था को आगे बढ़ाने पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।

नफे सिंह सैनी, पूर्व महासचिव, सैनी शिक्षण संस्था।



बच्चों को संस्कृति से जोड़ना होगा। शिक्षकों के साथ अभिभावकों को भी सोचना होगा, यह कैसे हो। स्पर्धा के दौर में हम अंग्रेजी माध्यम की ओर दौड़ रहे हैं जबकि अनेक देशों में अंग्रेजी की बजाय उनकी अपनी मातृ भाषा में ही पढ़ाई व अन्य सभी कार्य होते हैं। हमें अपनी अंग्रेजी संबंधी सोच बदलनी होगी। शिक्षा में भी बदलाव करना होगा।

अवनीश कुमार, सदस्य, सैनी शिक्षण संस्था।



समाज लोगों से जुड़ कर बनता है। बच्चे इसका अहम हिस्सा होते हैं। वे बड़ों को देखकर समय के साथ समाज का हिस्सा बनते जाते हैं। ऐसे में उन्हें शिक्षित, स्वावलंबी, दूरदर्शी व अच्छा नागरिक बनाने की जरूरत है। इसके लिए उन्हें भविष्य में वे क्या करना या बनना चाहते हैं, इसकी जानकारी दी जाए। उनकी काउंसिलिंग की जाए। इससे वे अपनी क्षमता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
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डीवी सैनी, सदस्य, यस वेलफेयर ट्रस्ट।
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