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Rohtak News: कहीं भरत मिलाप तो कहीं दशरथ कैकेई संवाद को दर्शाया

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रोहतक। रामलीला उत्सव कमेटी में मंगलवार को पांचवें दिन कलाकारों ने राम वनवास व भरत मिलाप का मंचन किया। इसका उदघाटन गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत आर्य व रामलीला उत्सव कमेटी के मुख्य संरक्षक राजेश जैन और प्रधान सुभाष तायल ने रिमोट का बटन दबाकर किया। इसमें मुख्य अतिथि कांग्रेस कमेटी के स्टेट कोर्डिनेटर सोशल मीडिया सूरजमल रोज, समाजसेवी डॉ. मनोज गोयल, उद्योगपति सुशील बंसल व लायंस क्लब के पूर्व प्रधान आरके जैन रहे।
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बाबा बालकपुरी डेरे से गाजे बाजे के साथ राम बरात निकाली, जो रामलीला पंडाल में पहुंची। पंडाल में पंडित द्वारा विवाह की सारी रस्में रीति रिवाज के अनुसार की गई। इस अवसर पर एक गरीब कन्या के विवाह के बाद सामान देकर विदाई करवाई गई। राजकुमार भरत को जब यह पता चलता है कि प्रभु श्रीराम अपने छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ चित्रकूट में ठहरे हुए हैं, तब भरत तुरंत उनसे मिलने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। उनके साथ उनका सैन्य दल भी होता हैं, क्योंकि वे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि कहीं बड़े भाई श्रीराम को कोई क्षति न पहुंचा सके।
पटेल नगर में हुआ भरत मिलाप का मंचन
पटेल नगर रामलीला में कलाकारों की ओर से भरत मिलाप का मंचन किया गया। इसके बाद रामचंद्र, सीता और लक्ष्मण पंचवटी के लिए निकलते हैं। डायरेक्टर धर्मेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि भरत अपनी माता कैकई, कौशल्या, सुमित्रा, गुरु वशिष्ट और शत्रुघ्न के साथ भगवान राम से मिलने वन में जाते हैं। रामचंद्र को देखकर भरत भाव विभोर हो जाते हैं।
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पंजाबी रामलीला में राम बरात और वनवास का मंचन
पंजाबी रामलीला में राम बरात के साथ श्रीराम वनवास का आयोजन किया गया। इसमें राम वनवास का भावुक दृश्य दिखाया गया। कैकई ने राजा दशरथ से दो वर मांगे। जिसके बाद राम को वनवास हुआ। राम और लक्ष्मण के साथ माता सीता भी वनवास को निकलीं।
प्राचीन रामलीला में दशरथ कैकेई संवाद का मंचन
रामलीला में जब भगवान राम को अयोध्या का राज देने की चर्चाएं आई तो रानी कैकई को उनकी दासी मंथरा ने भड़का दिया। मंथरा ने कहा कि राम तो राजा बन जाएंगे, मगर कैकई पुत्र भरत को कुछ नहीं मिलेगा। रानी कैकई कोप भवन में चली जाती है। वहां जाकर रूठ कर बैठ जाती है। जब राजा दशरथ को इस बात का पता चलता है तो वे कोप भवन में जाकर रानी कैकई से उसका कारण जानते हैं।
नेक कुकारो वाली में भरत मिलाप का हुआ मंचन
रामलीला के क्रम में भगवान श्रीराम निषादराज का आतिथ्य ग्रहण करने के बाद आगे बढ़ते हैं। अगले दृश्य में गंगा का किनारा होता है। भगवान श्रीराम इस बीच माता सीता व लक्ष्मण के साथ प्रवेश करते हैं। बार-बार कहने पर भी जब केवट नाव पर चढ़ाने को तैयार नहीं होता तो श्रीराम कारण पूछते हैं। लक्ष्मण को संशय होता है, राम उन्हें समझाते हैं। इस बीच भरत पहुंचते हैं और भगवान श्रीराम को देखते ही उनसे लिपट जाते हैं।
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