बादली (बहादुरगढ़)। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ सामाजिक कार्यों में सराहनीय भूमिका निभाने वाली कविता गुलिया ने मरणोपरांत देहदान का निर्णय लेकर महिलाओं के लिए मिसाल पेश की है। बादली के गांव जहांगीरपुर की बहू कविता गुलिया फिलहाल झज्जर में नर्सिंग ऑफिसर के ताैर पर सेवाएं दे रही हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित हो चुकी हैं।
कविता गुलिया का कहना है कि नारी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रह सकती, कुछ करने का जज्बा ही मंजिल काे आसान कर सकता है। मरणोपरांत देहदान करने वाली कविता का मानना है कि उनकी माैत के बाद भी आठ लोगों को जीवन मिल सकेगा। देहदान का फैसला शुरू में चुनौती पूर्ण रहा, लेकिन बाद में उन्हें अपने फैसले पर गर्व हो रहा है।
प्रीआरडी में रेवाड़ी जिले से पहली बालिका के रूप में चुनी गई थी कविता
2004 में प्रीआरडी कार्यक्रम में जिला स्तर पर कविता का चयन हुआ था। कविता का दावा है कि रेवाड़ी में वह पहली लड़की थीं जिनका जिले से चयन हुआ था। हाल में 29 फरवरी को एक नए राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर कविता को सम्मानित किया गया। वह लोगों को सामाजिक सद्भाव, भाईचारे को बढ़ाने के लिए वह काम कर रही हैं। इसी का परिणाम है कि विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कविता गुलिया को महिला दिवस पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने पंचकूला में सम्मानित किया है।
महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए कर रहीं काम
कविता को महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने में शानदार उपलब्धियां और समाज को सकारात्मक संदेश देने के लिए जाना जाता है। उनको लगातार 15 साल से नर्सिंग अधिकारी के तौर पर स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ-साथ, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नसबंदी अभियान, टीवी मुक्त अभियान और स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे पोलियो मुक्त अभियान में बढ़ चढ़कर भागीदारी की है। कोरोना काल में 2 साल तक सेवाएं देकर स्वास्थ्य विभाग को आगे बढ़ाया है और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सम्मानित होने का गौरव भी हासिल किया है।