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Sawan Shivratri 2023: मलमास के चलते 59 दिनों का सावन, शिव भक्त आठ सोमवार कर सकेंगे पूजा

Fri, 23 Jun 2023 01:26 PM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, रोहतक (हरियाणा)

सार

इस बार सावन की शुरुआत चार जुलाई 2023 से होने जा रही है और 31 अगस्त को सावन का समापन होगा। शिव भक्तों के लिए इस साल सावन का महीना खास रहेगा। इसी वजह से सावन 2 महीने का रहेगा।
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सावन 2023 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिव भक्तों के लिए इस साल सावन का महीना खास रहेगा। क्योंकि इस साल सावन मल मास के चलते 59 दिनों का है। इसमें भक्त चार नहीं आठ सोमवार को भगवान शिव की पूजा कर सकेंगे। भगवान शिव की पूजा के लिए सावन माह को खास माना जाता है, इसके चलते इसकी महत्ता अधिक बढ़ जाती है।

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चार जुलाई से शुरू होगा सावन
दुर्गा भवन मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज मिश्र ने बताया कि मलमास के चलते सावन 59 दिनों का हो गया है। इस बार का सावन भी बहुत ही खास है। इस बार सावन की शुरुआत चार जुलाई 2023 से होने जा रही है और 31 अगस्त को सावन का समापन होगा। वैदिक पंचांग के अनुसार, सौर मास और चंद्र मास के आधार पर साल 354 दिनों का होता है। जबकि सौर मास 365 दिन का होता है। ऐसे में दोनों में कुल 11 दिनों का अंतर आता है और हर तीन साल बाद यह अंतर 33 दिनों का हो जाता है। इसे अधिक मास के नाम से जाना जाता है। इसी वजह से सावन 2 महीने का रहेगा।

सावन शिवरात्रि 15 जुलाई शनिवार को
इस बार सावन का पहला सोमवार 10 जुलाई को है। दूसरा 17 जुलाई को सोमवार व्रत (शुद्ध) (सोमवती और हरियाली अमावस्या का संयोग), 18 जुलाई से मलमास पुरुषोत्तम मास लग जाएगा जो 16 अगस्त तक रहेगा। 21 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार शुद्ध, 28 अगस्त को सावन का चौथा सोमवार शुद्ध, 24 जुलाई को मलमास पुरुषोत्तम मास का पहला सावन सोमवार होगा। 31 जुलाई को मलमास पुरुषोत्तम मास का दूसरा सावन सोमवार व सात अगस्त मलमास पुरुषोत्तम मास का तीसरा सावन सोमवार होगा। 14 अगस्त को मलमास पुरुषोत्तम मास का चौथा सावन सोमवार है।

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ऐसे करें पूजा

सावन में पूजा की विधि में सोमवार को सुबह जल्दी स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत रखने का संकल्प लें और किसी मंदिर या घर पर ही शिवलिंग और शिव परिवार पर गंगाजल चढ़ाएं। इसके बाद ओम नम: शिवाय मंत्र का जप करते हुए भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर सफेद फूल, अक्षत, सफेद चंदन, भांग धतूरा, गाय का दूध, धूप, पंचामृत, सुपारी, बेलपत्र आदि चढ़ाएं। यदि सावन के सोमवार का व्रत कर रहे हैं तो सावन सोमवार की कथा जरुर पढ़ें। अंत में भगवान शिव को प्रसाद जरुर चढ़ाएं।

राशि अनुसार करें भगवान शिव का रुद्राभिषेक

मेष : शहद और गन्ने का रस से
वृष : दूध और दही से
मिथुन : कुशोदक और शरबत से 
कर्क, धनु : दूध और शहद से
सिंह : शहद और गन्ने का रस से
कन्या : कुशोदक और दही से
तुला : दूध और कुशोदक से
वृश्चिक : शहद, दूध, गन्ने का रस से
धनु : शहद, दूध और गन्ने के रस से
मकर : कुशोदक, गंगा जल में गुड़ डाल कर
कुंभ : कुशोदक और दही से
मीन : शहद, दूध और गन्ने के रस से
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पंडित के अनुसार

इस बार सावन में अधिक मास बीच में जुड़ रहा है। यह मास भगवान शिव व विष्णु दोनों को प्रिय है। इस माह हरि और हर दोनों एक साथ हैं। इसलिए यह 59 दिन का है। दो अमावस्या के बीच संक्रांति न आए तो पुरुषोत्तम मास बनता है। यह तीन साल बाद आता है। इसमें अधिक सोमवार होंगे और निष्काम पूजा की जाती है तो उसका अधिक फल मिलता है। इसके चलते सभी पर्व एक माह लेट हो जाएंगे। - पंडित सुरेश वशिष्ठ।
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