सावन में पूजा की विधि में सोमवार को सुबह जल्दी स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत रखने का संकल्प लें और किसी मंदिर या घर पर ही शिवलिंग और शिव परिवार पर गंगाजल चढ़ाएं। इसके बाद ओम नम: शिवाय मंत्र का जप करते हुए भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर सफेद फूल, अक्षत, सफेद चंदन, भांग धतूरा, गाय का दूध, धूप, पंचामृत, सुपारी, बेलपत्र आदि चढ़ाएं। यदि सावन के सोमवार का व्रत कर रहे हैं तो सावन सोमवार की कथा जरुर पढ़ें। अंत में भगवान शिव को प्रसाद जरुर चढ़ाएं।
मेष : शहद और गन्ने का रस से
वृष : दूध और दही से
मिथुन : कुशोदक और शरबत से
कर्क, धनु : दूध और शहद से
सिंह : शहद और गन्ने का रस से
कन्या : कुशोदक और दही से
तुला : दूध और कुशोदक से
वृश्चिक : शहद, दूध, गन्ने का रस से
धनु : शहद, दूध और गन्ने के रस से
मकर : कुशोदक, गंगा जल में गुड़ डाल कर
कुंभ : कुशोदक और दही से
मीन : शहद, दूध और गन्ने के रस से
इस बार सावन में अधिक मास बीच में जुड़ रहा है। यह मास भगवान शिव व विष्णु दोनों को प्रिय है। इस माह हरि और हर दोनों एक साथ हैं। इसलिए यह 59 दिन का है। दो अमावस्या के बीच संक्रांति न आए तो पुरुषोत्तम मास बनता है। यह तीन साल बाद आता है। इसमें अधिक सोमवार होंगे और निष्काम पूजा की जाती है तो उसका अधिक फल मिलता है। इसके चलते सभी पर्व एक माह लेट हो जाएंगे। - पंडित सुरेश वशिष्ठ।