रोहतक। माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में ब्रह्मलीन साध्वी गायत्री की कृपा से 5 दिवसीय 23वां वार्षिकोत्सव मनाया गया। मंगलवार सुबह 11 बजे संकट मोचन महिला मंडल की ओर से सुंदरकांड पाठ किया गया। श्रद्धालुओं ने मंदिर से वैदिक मंत्रोच्चारण, आराध्य देवों की पूजा-अर्चना और भक्तिभाव के साथ कलश यात्रा निकाली।
सचिव गुलशन भाटिया ने बताया कि यात्रा में गद्दीनशीन साध्वी मानेश्वरी देवी सहित भक्तजनों ने आकर्षित वेशभूषा पहनकर सिर पर गंगारूपी मंगल कलश रखकर मंगल गीत गाए। वहीं, श्रद्धालुओं ने जय जयकार के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यात्रा बाबरा माैहल्ला, बड़ा बाजार, गढ़ी मौहल्ला व मुख्य बाजारों से होते हुए बाबा लक्ष्मणपुरी महाराज डेरे पर पहुंची और श्रद्धा से कलश भरी।
भक्तजनों ने डेरा महंत कमलपुरी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। बाबा गुलाब पुरी व बरसाना से आईं महंत चंद्रकला ने भजन गाकर मंत्रमुग्ध किया। यात्रा में जगह-जगह भक्तों पर पुष्प वर्षा की गई और स्टाॅल लगाकर प्रसाद वितरित किया। इसके बाद यात्रा वापस कथा स्थल पर पहुंची जहां पुरोहितों ने विधिवत पूजन किया, कलश की स्थापना की और श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। साध्वी ने भक्तों को कथा में आने का आह्वान किया।
साध्वी मानेश्वरी देवी ने बताया कि कलश में भगवान विष्णु का वास होता है। सनातन धर्म में हर धार्मिक कार्यों में कलश का विशेष महत्व है। कलश रिद्धि-सिद्धि का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि कलश के मुख में भगवान विष्णु मंत्र का वास होता है और कंठ में रुद्र और मूल में ब्रह्मा जी वास करते हैं। साथ ही कलश के मध्य में दैवीय शक्तियां निवास करती हैं। यहां निशुल्क मेडिसन शिविर भी लगाया गया। लोगों ने स्वास्थ्य जांच करा कर शिविर का पूरा लाभ उठाया।