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Rohtak: जहां से पढ़े, वहीं मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे जस्टिस सूर्यकांत, बोले- मैं भी करता था प्राइवेट बस में सफर

Sun, 08 Jan 2023 02:10 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक

सार

जस्टिस सूर्यकांत बोले कि मैं भी प्राइवेट बस में सफर करता था। जीवन में एक लक्ष्य तय होना चाहिए। एमडीयू में एलीमेंट एलुमनाई स्पीक्स में छात्र-छात्राओं को मोटिवेट किया। 
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस न्यायमूर्ति सूर्यकांत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रोहतक महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई करने वाले और अब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत को अपने बीच पाकर विद्यार्थी गर्व से भाव विभोर हो गए। मौका था शनिवार को विवि में एलीमेंट एलुमनाई स्पीक्स कार्यक्रम का। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।

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विधि विभाग के पूर्व छात्र जस्टिस सूर्यकांत ने अपने भाषण में छात्र-छात्राओं से कहा कि एक समय था जब वे भी सभी छात्रों की तरह प्राइवेट बस में सफर कर विवि में आते थे। हर छात्र अपने मुकाम को हासिल कर सकता है। बस जीवन में लक्ष्य तय होना चाहिए। समाज में प्रत्येक व्यक्ति अपनी कारगर भूमिका निभा सकता है। केवल भौतिक सफलता ही सफलता नहीं, बल्कि अपने-अपने तरह से प्रत्येक व्यक्ति सकारात्मक, सृजनात्मक, प्रेरणादायी योगदान दे सकता है।

आर्ट ऑफ ड्राफ्टिंग निखारें 
उन्होंने विधि विभाग के विद्यार्थियों से आर्ट ऑफ ड्राफ्टिंग को निखारने तथा संचार कौशल (क्लैरिटी ऑफ ओरेट्री) पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। कहा कि विधि के विद्यार्थियों का कर्तव्य होना चाहिए कि वह न्याय के लिए अपनी प्रतिबद्धता अवश्य रखें। न्यायमूर्ति ने अपने विधि विभाग के शिक्षकों का विशेष उल्लेख करते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया।
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ये हैं जस्टिस सूर्यकांत 
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म सन 1962 में हिसार के गांव पेटवाड़ में हुआ। मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे सूर्यकांत ने गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज हिसार से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद 1984 में महर्षि दयानंद विवि रोहतक से कानून से स्नातक किया। 2011 में कुरुक्षेत्र विवि से मास्टर ऑफ लॉ में वह प्रथम श्रेणी पर रहे थे। उन्होंने कानून की पढ़ाई करने के बाद हिसार जिला अदालत से अपना कानून का अभ्यास शुरू किया था। बाद में उन्हें चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत एक के बाद एक सफलता के मुकाम पर बढ़ते रहे। अपने कठिन मेहनत, दृढ़ संकल्प, सहज व्यवहार की बदौलत आज वह सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश हैं। 

 

न्यायमूर्ति सूर्यकांत की उपलब्धियों पर नाज : कुलपति
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि विधि विभाग के प्रतिष्ठित एलुमनाई के सहयोग से एमडीयू विधि विभाग को शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र बनाएगा। एमडीयू एलुमनाई विवि के ब्रांड एंबेसडर हैं जो कि विश्वविद्यालय की गौरव पताका फहराते हैं। एमडीयू समुदाय को न्यायमूर्ति सूर्यकांत की उपलब्धियों पर नाज है। कुलसचिव प्रो. गुलशन लाल तनेजा ने स्वागत भाषण दिया। विधि विभाग की अध्यक्ष तथा विधि संकाय की डीन प्रो. कविता ढुल ने विधि विभाग के इतिहास तथा उपलब्धियों की जानकारी दी। निदेशक एलुमनाई रिलेशन्स प्रो. शालिनी सिंह ने एमडीयू एलुमनाई की उपलब्धि तथा इस विभाग की गतिविधियों बारे बताया।

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