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Rohtak: आयुष्मान कार्ड के बावजूद मरीज से रुपये वसूले, चार अस्पताल संचालकों पर 4 लाख रुपये का जुर्माना

Wed, 09 Aug 2023 11:26 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

आयुष्मान भारत योजना के जिला नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश गर्ग ने सख्त कदम उठाया है। निजी अस्पतालों की मनमानी के विरुद्ध अप्रैल से जून तक कार्रवाई की गई है। 
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आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी को चेक प्रदान करते डॉ. दिनेश गर्ग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आयुष्मान भारत योजना को लेकर हरियाणा के रोहतक जिले में लगातार फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उन्हें पूरी तरह कैशलेस इलाज नहीं दिया जा रहा है। कार्ड होने के बाद भी मरीजों से रुपये वसूलने चार मामले सामने आए हैं।
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इनमें आयुष्मान भारत योजना के जिला नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश गर्ग ने सख्ती बरतते हुए चारों निजी अस्पताल संचालकों पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अप्रैल से जून तक यह कार्रवाई की गई है। साथ ही उन्हें दोबारा ऐसे करने पर पैनल से बाहर करने (डी-इंपैनल) की भी चेतावनी दी है।

जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण आयुष्मान भारत रोहतक ने पैनल में शामिल निजी अस्पताल संचालकों की मानमानी पर शिकंजा कसने का काम किया है। योजना के तहत मरीज को पूर्णत: कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं देने की शिकायत पर उपायुक्त अजय कुमार की देखरेख में जांच की गई। जांच में आरोप सिद्ध हुए।
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इसके चलते एक निजी अस्पताल संचालक पर एक लाख 70 हजार रुपये, दूसरे पर एक लाख रुपये, तीसरे पर 23 हजार रुपये व चौथे अस्पताल पर एक लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई दूसरे अस्पताल संचालकों के लिए भी सबक हाेगी।

एडीसी की देखरेख में काम करती है जिला स्तरीय कमेटी आयुष्मान योजना
सरकार ने आयुष्मान योजना बेहतर क्रियान्वयन व मरीजों को न्याय दिलाने के लिए जिला शिकायत निवारण कमेटी की व्यवस्था की है। उपायुक्त की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में एडीसी, सिविल सर्जन व आयुष्मान भारत योजना के जिला नोडल अधिकारी शामिल हैं। यहां आने वाली शिकायत की जांच की जाती है।

जांच में आरोप सिद्ध होने पर पहली बार में कमेटी पांच गुणा तक पैनल्टी लगा सकती है। दूसरी बार दोषी मिलने पर अस्पताल को अस्थायी रूप से डी-इंपैनल किया जा सकता है। तीसरी बार गड़बड़ी मिलने पर अस्पताल को स्थायी रूप से डी-इंपैनल्ड किया जा सकता है। ऐसे में कार्ड धारक या योजना के लाभ पात्र अपने साथ हुई गड़बड़ी की इस कमेटी से शिकायत कर सकते हैं।

आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड धारक को सरकार की ओर से पैनल पर लिए गए अस्पतालों को पूरी तरह कैशलेस इलाज मुहैया कराना होता है। मरीज से इलाज का किसी भी तरह का पैसा नहीं लिया जाता है। यदि कोई ऐसा करता है तो कमेटी या नोडल अधिकारी को शिकायत की जा सकती है। कमेटी ने इस तरह के चार मामलों में कार्रवाई करते हुए चार अस्पताल संचालकों पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यही नहीं दो दिन पहले ही एक व्यक्ति को उसकी राशि का चेक जारी किया गया है। -डॉ. दिनेश गर्ग, जिला नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत।
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