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रोडवेज की राष्ट्रव्यापी हड़ताल 8 जनवरी को

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हरियाणा कर्मचारी महासंघ ने केंद्र व राज्य सरकार पर कर्मचारी और आमजन विरोधी नीतियों का आरोप लगाते हुए आठ जनवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है। साथ ही महासंघ ने सरकार पर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने और जनहित से जुडे़ विभिन्न विभागों को निजीकरण करने का भी आरोप लगाया। वीरवार को नए स्टैंड स्थित हरियाणा महासंघ के कार्यालय में प्रदेश स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में महासंघ के प्रांतीय महासचिव वीरेंद्र सिंह धनखड़ ने कहा कि सरकार पूंजीपति व धनाढ्य व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के लिए जनहित से सरोकार रखने वाले विभागों पर तालाबंदी करना चाहती है, जिसे कर्मचारी किसी कीमत पर सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग सवा लाख स्वीकृत पद भरने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पुरानी पेंशन नीति को बहाल करने, जोखिम भत्ता देना, पंजाब के समान वेतनमान, आवश्यकता अनुसार नये पदों का सृजन करना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली मजबूत करने, परिवहन विभाग में किलोमीटर स्कीम रद्द करने, अक्तूबर 2018 में रोडवेज हड़ताल के दौरान कर्मचारियों व जनसंगठनों पर लगाई एस्मा को शीघ्र निरस्त करने, केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा 25 या 55 वर्ष की आयु पर जबरन सेवानिवृत्त निर्णय के आदेशों को तत्काल वापिस लेने की मांग की। वीरेन्द्र सिंह धनखड़ ने प्रदेश के सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार से कर्मचारियों के संवैधानिक मौलिक अधिकारों पर हमला करने वाले विधायक पर अंकुश लगाने की मांग की। बैठक में वित्तसचिव दिलबाग अहलावत, बिजेंद्र बैनिवाल, जिला प्रधान जोगेंद्र बल्हारा, सचिव बिजेन्द्र गुलिया, युद्धवीर दांगी, सुरेंद्र मकडौली, रामधारी गिल, विजय अहलावत, नीरज सिंधु, उमेद घनघस, मनीष पोलंगी, चरण सिंह, जयप्रकाश व कुलदीप कौशिक प्रमुख आदि मौजूद रहे।
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