जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान फरवरी 2016 में महम थाने में लूटपाट व आगजनी के केस में मंगलवार को एएसजे राजकुमार यादव की अदालत में सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की तरफ से बताया गया कि आरोपी मंजीत की मौत हो चुकी है। ऐसे में अदालत ने महम पुलिस को आरोपी का 20 दिसंबर तक मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश दिए।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक महम थाने के मुंशी विनोद कुमार ने 20 फरवरी 2016 को शिकायत दी थी कि जाट आरक्षण आंदोलन के चलते पुलिस की एक टीम रोहतक गई हुई थी। सुबह दो से तीन हजार लोग थाने के अंदर घुस गए। उनके पीछे भी पांच-छह हजार लोग थे। उनको मौजूद पुलिसकर्मियों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने सुनवाई नहीं की। थाने को चारों तरफ से घेर लिया गया। पुलिसकर्मी कम होने के कारण लोगों को रोकने में नाकाम रहे। देखते ही देखते कंप्यूटर लैब, रिकॉर्ड रूम, माल खाना, ड्राइवर रूम व अन्य जगह तेज छिड़ककर आग लगा दी। डीएसपी भी आए, लेकिन भीड़ ने एक नहीं सुनी। चुनाव के चलते थाने में जमा हथियारों को भी लूट लिया गया। पुलिस ने 22 लोगों को नामजद करते हुए भीड़ के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 436, 427, 395 व अन्य के तहत केस दर्ज किया था। मामले में पुलिस की तरफ से 14 लोगों के खिलाफ ही चालान दाखिल किया गया। इसमें अभी अदालत में सुनवाई चल रही है।
पुलिस ने 14 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें मंजीत भी शामिल था। उसकी मौत हो गई है। अदालत की तरफ से महम पुलिस से आरोपी के संबंध में पूरी रिपोर्ट मांगी है। साथ में मृत्यु प्रमाणपत्र भी पुलिस को जमा कराना होगा। अब मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी। -संदीप वर्मा, वकील बचाव पक्ष