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शोध की मौलिकता, गुणवत्ता पर शोधार्थी विशेष ध्यान दें : प्रो. मान

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रोहतक। शोध की मौलिकता, गुणवत्ता, विषय की नवीनता और उपयोगिता पर शोधार्थी ध्यान दें। मौलिक चिंतन, नवाचार युक्त समाज हितकारी और समस्या उन्मूलक शोध करें। यह उद्गार महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एएस मान ने सोमवार को स्वराज सदन में रिसर्च मैथडोलॉजी विषयक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए व्यक्त किए।
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के जीवविज्ञान संकाय, अंत: विषय अध्ययन संकाय और चौ. रणबीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डीन प्रो. मान ने कहा एमडीयू में रिसर्च इको सिस्टम को मजबूत बनाने और शोध संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने शोध में नैतिक मूल्यों को महत्वपूर्ण बताया। डीन, रिसर्च और डेवलपमेंट प्रो. अरुण नंदा ने बताया कि कुलपति प्रो. राजबीर सिंह के दिशा-निर्देशन में एमडीयू में शोध इको सिस्टम को सुदृढ़ किया गया है। डीन, फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज और कार्यशाला कंवीनर प्रो. राजेश धनखड़ ने लाइफ साइंसेज की विकास यात्रा और शोध उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में स्पेशल सेंटर फॉर नैनोसाइंस, जेएनयू, नई दिल्ली की प्रो. प्रतिमा सोलंकी ने रोल ऑफ नैनोटेक्नोलाॅजी इन बायोलॉजिकल साइंसेज विषय पर, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के प्रो. राजिंदर सिंह ने एफटीआईआर एनालिसिस इन बायोलॉजिकल साइंसेज और एमडीयू के प्रो. राजबीर हुड्डा ने मानव जैविक के अपरंपरागत विषय पर विशेष व्याख्यान दिए।
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