रोहतक। भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) ने एक और कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। संस्थान ने अपने मुख्य स्नातकोत्तर कार्यक्रम में 14वें बैच को शामिल किया है। इस एमबीए कार्यक्रम में शामिल 264 विद्यार्थियों के नए बैच के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उम्मीदवार शामिल हैं। इसमें 205 बेटियां हैं। यह संख्या 78 प्रतिशत है। पिछले वर्ष संस्थान में 70 प्रतिशत बेटियां थीं। यानी इस वर्ष 8 प्रतिशत अधिक बेटियां संस्थान में आई हैं। यह संस्थान का एमबीए कार्यक्रम में लैंगिक विविधता का नया रिकाॅर्ड है। नए बैच में तैराकी व कराटे में दो राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी हैं।
संस्थान में प्रवेश के लिए दो दिन तक चलने वाले ओरिएंटेशन कार्यक्रम का शुभारंभ 1 जुलाई को शुरू हुआ था। यहां राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य सचिव कमल किशोर, गीतकार समीर, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन अतिथियों की उपस्थिति में नया बैच शामिल किया गया। आईआईएम के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा ने नए बैच का स्वागत करते हुए कहा कि आईआईएम रोहतक के छात्र प्रतिस्पर्धी माहौल से गुजरे हैं। उन्हें मिले अवसर का भरपूर लाभ उठाना चाहिए।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य सचिव कमल किशोर ने कहा कि विद्यार्थियों से उन्हें तीन उम्मीदें हैं। पहला,वह कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व से आगे बढ़कर सामाजिक रूप से जिम्मेदार कॉर्पोरेट की ओर बढ़ेंगे। दूसरा, आप दीर्घकालिक मूल्य निर्माण और स्थिरता के बारे में सोचेंगे, अल्पकालिक लाभ के बारे में नहीं। तीसरा, प्रबंधन का अध्ययन करते समय अपना काम बहु-विषयक दृष्टिकोण के माध्यम से करेंगे।
अतिथि समीर ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि जिस दिन खुद को किसी चीज़ का मास्टर मान लेंगे, उसी दिन आप सीखना बंद कर देंगे और इससे आपकी रचनात्मकता खत्म हो जाएगी। लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और उसके घटकों से अवगत कराया।
पीजीपी 14 इंडक्शन और ओरिएंटेशन के दूसरे दिन मनोज मधुसूदन, नवीन कुंडू, गौरव हिमकर, डॉ. सीमा सिंह समेत कई उद्योग विशेषज्ञ मौजूद रहे। इन्होंने पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हासिल करने में उपभोग व्यवहार को समझना विषय पर हुई पैनल चर्चा में भाग लिया। प्रो. कौस्तुभ घोष ने सत्र की शुरुआत में कहा कि भारत पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के अपने लक्ष्य के करीब है। विकास के लिए तैयार है। मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता है। संस्थान में अशोक कुमार, प्रताप रेड्डी, शत्रुजीत कपूर, असित सिंह व अन्य कानून अधिकारी उपस्थित रहे।