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Rohtak News: प्राणीजन्य रोगों से बचाव के प्रति जागरूक किया

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रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआई) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में रविवार को एक जूनोटिक डिजीज (प्राणीजन्य रोग) प्रति जागरूकता व सेंसटाइजेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। जूनोटिक डिजीज वह बीमारी होती है जो पशुओं से मनुष्य में फैलती है।
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माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. अपर्णा परमार के प्रयासों से कुछ प्रमुख जूनोटिक डिजीज की जांच माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शुरू हो गई है। वहीं इसके साथ ही पीजीआईएमएस को सेंटिनल सर्विलांस साइट भी बनाया गया है, जिसकी नोडल अधिकारी माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मधु शर्मा को बनाया गया है। डॉ. अपर्णा परमार ने बताया कि अन्य विभागों से भी नोडल ऑफिसर साइट से जुड़े हैं जैसे कम्युनिटी मेडिसिन से डॉ. मीना राजपूत मेडिसिन विभाग से डॉ. मोहिनी शिशु रोग विभाग से डाॅ. अंजलि, पलमोनरी मेडिसिन से डॉ. पवन व पैथोलॉजी विभाग से डॉ. रिचा शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में करीब 50 पीजी व सीनियर रेजिडेंट ने हिस्सा लिया।
डॉ. मधु ने बताया कि यह सेंटिनल सर्विलांस साइट एनसीडीसी नई दिल्ली के अंतर्गत कार्यरत है। इसका प्रमुख उद्देश्य जूनोटिक बीमारियों की जल्दी पहचान व सही जांच करना है और साथ में वन हेल्थ कांसेप्ट को ध्यान में रखते हुए एनिमल हसबेंडरी एग्रीकल्चर विभागों के साथ मेल जोल से इन पर बीमारियों पर नियंत्रण करना है। उन्होंने बताया कि लोगों के बीच इन बीमारियों जैसे कि ब्रूसेलोसिस, स्क्रब टाइफस की जानकारी पहुंचना की यह क्या है, कैसे फैलती हैं और उनकी रोकथाम का इलाज कैसे करना है। कार्यशाला का उद्घाटन डीन एकेडमीक अफेयर डॉ. ध्रुव चौधरी ने किया। उन्होंने उपस्थित चिकित्सकों को संबोधित करते हुए मरीजों के बेहतर इलाज के लिए समय पर जांच व निदान पर जोर दिया। इन बीमारियों के प्रति समाज में जागरूकता लाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
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इस मौके पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग से डॉ. अपर्णा, डॉ. मधु शर्मा, डॉ. निधि, डॉ. पीएस गिल, डॉ. अंतरिक्ष, डॉ. किरण बाला, डॉ. रितु व अनिल जांगरा मौजूद रहे।
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