रोहतक। शहर में जाम की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने नया फार्मूला निकाला है। अब प्राइवेट पार्किंग चलाने के लिए निगम लाइसेंस देगा। इसके लिए 500 वर्ग मीटर प्लॉट होना अनिवार्य है। साथ में रास्ता 12 मीटर या इससे अधिक चौड़ा होना चाहिए। इसके साथ ही 100 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से सालाना फीस जमा करानी होगी। साथ ही नगर निगम हाउस द्वारा तय फीस पार्किंग संचालक वाहन मालिकों से वसूल कर सकेगा। निगम की पार्किंग में 12 घंटे की फीस कार के लिए 30 तो बाइक के लिए 10 रुपये है।
साल 2010 में प्रदेश सरकार ने रोहतक शहर की नगर परिषद को भंग करके नगर निगम का बना दिया था। क्योंकि समय के साथ शहर की जनसंख्या बढ़ता जा रही है। 2011 के सर्वे के मुताबिक शहर की जनसंख्या पौने चार लाख थी, जो 2017 में बढ़कर 5 लाख 12 हो गई। अब 6 लाख से ज्यादा हो चुकी है। हालांकि आधिकारिक आंकड़ा अभी जारी नहीं हुआ है। शहर की जनसंख्या बढ़ने के साथ वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस कारण हर रोज जाम की समस्या रहती है।
सरकारी पार्किंग नहीं बना सका नगर निगम
नगर निगम हाउस में पांच साल पहले सोनीपत स्टैंड, अशोका चौक, मेडिकल मोड़ व डी पार्क पर पार्किंग बनाने का प्रस्ताव पास किया था, लेकिन आज तक योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। इसका कारण बजट का न होना बताया जाता है। दो साल पहले निगम ने प्रस्ताव पास कर शहर में प्राइवेट पार्किंग बनाने की अनुमति देने का निर्णय लिया था, लेकिन प्रस्ताव फाइलों से बाहर नहीं आ सका। अब नये निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने प्राइवेट पार्किंग योजना को सिरे चढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि जाम की समस्या कम हो सके।
बिना फीस भरे चल रही शहर में प्राइवेट पार्किंग
निगम जहां प्राइवेट पार्किंग को लाइसेंस देकर चालू करने की योजना बना रहा है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में कई जगह पहले से प्राइवेट पार्किंग चल रही हैं। पार्किंग संचालक मनमाने तरीके से रेट वसूल कर रहे हैं। कार मालिकों से प्रति माह के हिसाब से किराया वसूल किया जाता है, लेकिन निगम को कोई फीस जमा नहीं कराई जा रही है।
वर्जन
योजना को गंभीरता से लागू किया जाएगा। जो प्राइवेट पार्किंग संचालक तय शर्तों को पूरा करेगा, उससे सालाना फीस लेकर लाइसेंस दिया जाएगा। इसके लिए तत्काल आवेदन जमा कराया जा सकता है। बिना लाइसेंस चल रही पार्किंग का सर्वे कराया जाएगा। फीस जमा न कराने पर कार्रवाई होगी।
- धीरेंद्र खड़गटा, आयुक्त नगर निगम
हाउस में प्रस्ताव पास कराया गया था, लेकिन निगम प्रशासन ने गंभीरता से लागू नहीं किया। अब नए आयुक्त से उम्मीद है। प्राइवेट पार्किंग योजना से न केवल निगम को आय होगी, बल्कि शहर में जाम की समस्या भी कम होगी।
- मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम