रोहतक। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र पीजीआईएमएस की व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। कहने को यहां 50 से ज्यादा जांच होती है, मगर मरीजों को विटामिन-डी, बी-12 की सामान्य जांच के लिए भी निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। इसकी वजह जांच किट का नहीं होना बताया जा रहा है। अमर उजाला ने वीरवार को पीजीआई की ओपीडी का हाल जाना तो यह सच सामने आया। इस बारे में संस्थान के जिम्मेदार कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं।
वीरवार सुबह 11:30 पर अमर उजाला टीम ओपीडी में पहुंची। यहां 75 नंबर कमरे के बाहर मरीज अपनी जांच के लिए कतारबद्ध नजर आए। हाथों में जांच की पर्ची लिए खड़े मरीजों को लंबा इंतजार करने के बाद जांच के लिए बुलाया गया। इसमें भी बड़ी संख्या में मरीजों को कुछ जांच के लिए बाहर का रास्ता दिखाया गया। यहां होने वाली जांच के सैंपल लेने के बाद शेष जांच के लिए मरीजों निजी लैब जाना पड़ा। इसमें विटामिन-डी, बी-12, सीसीपी, पीटीजी, टैफी डॉट मुख्य हैं। इन सामान्य जांच के लिए मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। इसके बाद टीम ओपीडी की दूसरी व तीसरी मंजिल पर बनी लैब पहुंची। यहां लोग अपने सैंपल जमा कराते नजर आए।
संस्थान में थायराइड जांच अब भी सीमित
संस्थान में रोजाना औसतन करीब सात हजार से अधिक मरीज आते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में मरीजों को थायराइड जांच की जरूरत पड़ती है। अकेले मेडिसन विभाग के आंकड़े पर नजर डालें तो यहां करीब 400 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें से लगभग आधे मरीजों को यह जांच करानी पड़ती है। जबकि जांच केवल सीमित है। संस्थान में काफी समय पहले किट की कमी के चलते 150 सैंपल जांचने की व्यवस्था की गई थी। अब भी यही व्यवस्था चली आ रही है। जबकि मरीजों की संख्या इससे कई गुणा अधिक रहती है। इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है।
कलर डॉपलर व यूरिक एसिड की जांच भी बाहर से
संस्थान में मरीजों को कलर डॉपलर जांच के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। पिछले कुछ दिनों से यह जांच नहीं हो पा रही है। अल्ट्रासाउंड भी कम हो रहे हैं। यहां मरीजों की भीड़ के लिए पांच ही मशीनें बताई गई हैं। इसके चलते सभी मरीजों को समय पर जांच का लाभ नहीं मिल रहा है। यूरिक एसिड जांच के लिए भी निजी लैब ही सहारा है। यह जांच भी कई दिनों से संस्थान में नहीं हो पा रही है।
वर्जन
हमारे यहां अधिकांश मरीजों की जांच हो रही है। जो जांच नहीं हो रही हैं, उन्हें शुरू कराया जाएगा। इसके अलावा यदि किसी जांच पर संख्या का प्रतिबंध है तो उसे संबंधित विभाग से बात करके हटवाया जाएगा। मरीज को उपचार में कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
- डॉ. शमशेर सिंह लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस