रोहतक। पीरबोधी केमिकल ब्लॉस्ट में नौ दिन बाद भी पुलिस को जनस्वास्थ्य विभाग एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाया है। घटना के बाद ही पुलिस ने जन स्वास्थ्य विभाग से केमिकल और संबंधित फर्म के बारे में जानकारी मांगी है। अभी तक पुलिस को रिपोर्ट नहीं मिली और इस कारण यह मामला लंबा खिंचता जा रहा है। वहीं, पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट मिलने का इंतजार है, इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
शहर में इस समय सीवर लाइन की मरम्मत का काम चल रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से गोहाना रोड पर पीरबोधी के पास दूषित पानी की निकासी के लिए डिस्पोजल सेंटर बना रखा है। यहां पर सीवर लाइन को जोड़ने में प्रयोग आने वाले पेरोक्साइड केमिकल के 15 डिब्बे लाए गए थे। इनके लिए कमरे का तापमान 20 डिग्री से ऊपर नहीं जाना चाहिए था। 19 जून की रात को 11 से 12 बजे तक बिजली चली गई और उसी दौरान केमिकल का तापमान बढ़कर लगभग दोगुना हो गया। इस कारण ब्लास्ट हो गया था। हादसे में उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के गांव कुचलपुर निवासी सुपरवाइजर धर्मवीर और बिहार के कटिहार निवासी प्रेमनाथ की मौत हो गई थी। हादसे के बाद पुलिस ने केमिकल को सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार और उसके गाइडलाइन की जानकारी स्वास्थ्य विभाग से मांगी गई। मगर घटना के 9 दिन बीतने के बावजूद जांच को पुलिस कदम भी आगे नहीं बढ़ा पाई है। जबकि केमिकल ब्लास्ट के पीछे सीधे-सीधे लापरवाही है और इसमें जिम्मेदारों के नाम तय किए जाने हैं। लेकिन पुलिस ने हादसे के बाद से कोई कार्रवाई नहीं की है।
पुलिस ने मांगी यह रिपोर्ट
- खतरनाक केमिकल की देख रेख की किस कंपनी की जिम्मेदारी थी?
-उसे कितने तापमान में रखना था और क्या उसकी पूरी व्यवस्था थी?
-यदि पूरी व्यवस्था थी तो केमिकल का ब्लास्ट क्यों हुआ?
-इस घटना के लिए कौन-कौन जिम्मेदार लोग या कंपनी है?
-यदि यह खतरनाक केमिकल था तो इसमें श्रमिकों को क्यों रखा गया?
-तापमान को कम करने के लिए संबंधित एजेंसी ने क्या कोई व्यवस्था की थी?
-तापमान कम रखने के लिए बिजली के साथ जनरेटर क्यों नहीं लगाया गया?
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घटना के बाद संबंधित कंपनी के सुपरवाइजर प्रतीक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जा चुका है। अब रिपोर्ट आने का इंतजार है, उसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
सन्नी सिंह, प्रभारी सुखपुरा चौकी।