हाईकोर्ट केआदेशों के बाद भी एमएलआर ऑनलाइन शुरू नहीं करना पीजीआई प्रशासन को भारी पड़ गया है।
अब अदालत की अवमानना का नोटिस पीजीआई प्रशासन को मिला है। करीब दो पहले मिले इस नोटिस के बाद पीजीआई प्रशासन अब इसका जवाब तलाश रहा है।
सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन को 21 दिसंबर को कोर्ट में अपना जवाब पेश करना है।
पीजीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों को एमएलआर ऑनलाइन करने के निर्देश 2011-12 से दिए थे।
लेकिन तब से लेकर अब तक कोई व्यवस्था यहां नहीं हुई और एमएलआर ऑनलाइन करने का कोई रास्ता नहीं निकाला गया।
इसके लिए महज एक कंप्यूटर और एक ऑपरेटर की ही व्यवस्था करनी थी, लेकिन करोड़ों रुपये के सालाना बजट वाले पीजीआई में यह व्यवस्था भी फॉरेसिंग विभाग में नहीं की। सूत्रों की माने तो फॉरेंसिक विभाग के एक डेटा ऑपरेटर को इमरजेंसी विभाग में लगा रखा है। जिससे फॉरेंसिक विभाग का काम भी प्रभावित होता रहा है।