रोहतक। नर्सिंग एसोसिएशन की अनिश्चतकालीन हड़ताल के दूसरे दिन भी मरीजों को संघर्ष करना पड़ा। तीमारदारों ने मरीजों को संभाला। पीजी विद्यार्थियों ने फिलहाल मोर्चा संभाले हुए है। लेकिन, वह स्वयं प्रशिक्षण ले रहे हैं ऐसे में उनपर दबाव ज्यादा है। वहीं पीजीआई प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए है।
आपातकालीन विभाग में गंभीर मरीजों के ही बन रहे कार्ड
इधर, पीजीआई के वार्ड में मरीज ही मरीज दिखाई दिए। इक्का-दुक्का नर्साें ने पूरा वार्ड संभाले रखा। नर्सिंग एसोसिएशन की हड़ताल के चलते आपातकालीन विभाग में सिर्फ सर्प दंश व अति गंभीर मरीजों को ही भर्ती किया गया। साधारण मरीजों को ओपीडी में इलाज के लिए भेजा गया है। हड़ताल से पहले आपातकालीन विभाग में करीब 1000 मरीजों के कार्ड बनाए जाते थे, जो अब घटकर 250 के आसपास रह गए हैं।
वार्ड तीन में खुद के पंखें लेकर आ रहे मरीज
सेंट्रालाइज्ड एसी वाले पीजीआईएमएस मरीजों को घर से पंखा लेकर आना पड़ रहा है। वार्ड तीन में ऑर्थोपेडिक सर्जरी वाले मरीज भर्ती हैं। ऐसे मरीजों को पसीने से बचाकर रखना पड़ता है। इस कक्ष में एसी न होने के कारण मरीजों को पसीने से बचाने के लिए तीमारदारों को घर से पंखा लेकर आए हैं।
कर्मचारियों ने चेताया....मांगें पूरी होने पर ही काम पर लौटेंगे
शुक्रवार को नर्सिंग कर्मियों ने विजय पार्क में एकत्रित होकर सरकार खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगें दोहराई। रोहतक नर्सिंग एसोसिएशन के प्रधान विकास फोगाट ने बताया कि सरकार ने उनकी मांगों पर अभी तक कोई गौर नहीं किया है। वह ज्ञापन भी दे चुके हैं। वीसी से मिल चुके हैं। ऐसे में अब सीएम से ही वार्तालाप करेंगे। जनरल सेक्रेट्री राहुल वत्स ने कहा कि उनकी मांगें जायज हैं। इन्हें सरकार बड़ी आसानी से पूरा कर सकती है। उनकी मांग सिर्फ केंद्र की तर्ज पर अपने भत्ते बढ़वाने की है। मांगें पूरी होने पर ही काम पर लौटेंगे।
मांगों को पूरा कराने के लिए फांसी के फंदे पर झूलने को तैयार
प्रधान विकास फोगाट ने बताया कि पीजीआईएमएस प्रशासन ने उन्हें धमकी भरा पत्र लिखा है। लेकिन, वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह अब भगत सिंह के रास्ते पर उतर चुके हैं और अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए फांसी के फंदे पर झूलने के लिए तैयार हैं। पीजीआईएमएस प्रशासन ने उन्हें इस प्रकार से दोबारा धमकी देकर उनकी एकता को तोड़ने का प्रयास किया है तो वे कुलपति, कुलसचिव व निदेशक सहित चिकित्सा अधीक्षक की कुर्सी भी बदलवाए बिना हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। आज उन लोगों की वजह से ही अभी तक सरकार ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया है। ऐसे में इस प्रकार की धमकी देकर प्रशासन अपनी ही कुर्सी को खतरे में डाल रहा है।