देश की आजादी से भी पहले से समाज में शिक्षा की अलख जगाने वाली जाट शिक्षण संस्था के चुनाव की राह साफ हो गई है। संस्था में आठ साल बाद चुनाव होने जा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) महेश कुमार को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया है। वह जल्दी ही संस्था की मतदाता सूची जांच कर उसे सार्वजनिक करने के साथ चुनावी शेड्यूल भी जारी करेंगे।
2015 में भंग हो गई थी जाट संस्था की कार्यकारिणी
जाट संस्था की अंतिम कार्यकारिणी वर्ष 2015 तक रही। इस वर्ष संस्था सदस्यों ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकार से शिकायतें कीं। इसके चलते सरकार ने कार्यकारिणी को भंग कर दिया। इसके बाद नई कार्यकारिणी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। चुनावी शेड्यूल के अनुसार नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई। इसी दौरान फोटो पहचान पत्र को लेकर मुद्दा उठा। विवाद इतना बढ़ा कि चुनावी प्रक्रिया रोकनी पड़ी। कुछ सदस्यों ने न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद से मामला अटका हुआ है। हालांकि किसी भी संस्था में नियमानुसार अधिकतम पांच वर्ष का प्रशासक कार्यकाल पूरा हो सकता है। इसके बाद बावजूद संस्था की जिम्मेदारी अब भी प्रशासक के हाथों में है।
यह है जाट संस्था का इतिहास
जाट शिक्षण संस्था की स्थापना वर्ष 1913 में हुई थी। स्थापना के बाद कई दशक तक सर्वसम्मति से संस्था का प्रधान चुना जाता रहा। कुछ दिनों तक अस्थायी प्रधान भी रहे। इसके बाद सितंबर 1913 में चौधरी देवी सिंह को सर्वसम्मति से प्रधान बनाया गया। संस्था में वोटों से होने वाला पहला चुनाव वर्ष 1990 में हुआ। वर्ष 2015 के बाद से चुनाव नहीं हुए।
संस्था के 15500 सदस्य चुनेंगे 105 कॉलेजियम सदस्य
जाट संस्था में लगभग 15500 सदस्य हैं। यही सदस्य नई कार्यकारिणी का चयन करेंगे। इसके लिए नए फर्म एंड सोसाइटी एक्ट के तहत 105 कॉलेजियम सदस्य चुने जाएंगे। ये 105 सदस्य गवर्निंग बॉडी का चुनाव करेंगे। इसमें प्रधान समेत अन्य पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्य शामिल हैं।
वर्जन
संस्था चुनाव को लेकर प्रयास जारी हैं। चुनाव जल्द कराए जाएंगे। सरकार ने चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिया है। चुनाव अधिकारी ही मतदाता सूची और चुनाव शेड्यूल तय करेंगे।
डॉ. नवनीत अहलावत, ओएसडी, प्रशासक, जाट संस्था।
वर्जन
सरकार ने जाट संस्था के चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी है। इस संबंध में जल्दी कार्रवाई की जाएगी। चुनावी शेड्यूल जारी कर शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराए जाएंगे।
महेश कुमार, एडीसी।