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Rohtak News: दर्द से पाया पार, पीछे छोड़ी हार

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बॉक्सर प्रीति पंवार। स्रोत : परिजन
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महम (रोहतक) । 13 साल की आयु में बॉक्सिंग खेलना शुरू किया। करीब साल भर प्रयास किया, मगर चोट का दर्द और कड़ी मेहनत कमजोर शरीर सहन नहीं कर पाया। खेलना छोड़कर किताबों से दोस्ती कर ली। टीस मन में घर कर गई। खुद को लड़ने के लिए तैयार किया। कोविड में दोबारा खेलने का मौका मिला तो पहले से अधिक जोश के साथ मैदान में कदम रखा। चोट का दर्द सहा। मेहनत की भट्ठी में खुद को घंटों तपाया। एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करने वाली प्रीति पंवार की कहानी आज सबके लिए नजीर है।
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मूल रूप से भिवानी और हाल महम के वार्ड नौ निवासी 19 वर्षीय प्रीति पंवार ने चीन में चल रहे एशियाई गेम्स में अपने पंच का पावर दिखाया और पदक पक्का करने के साथ सेमीफाइनल में प्रवेश किया साथ ही पेरिस ओलंपिक का टिकट भी हासिल कर लिया है। स्पर्धा के 54 किलो ग्राम भार वर्ग के क्वार्टर फाइनल में बॉक्सर प्रीति पंवार ने शानदार प्रदर्शन कर जीत दर्ज की। 19 वर्षीय बॉक्सर ने कजाकिस्तान की 3 बार की विश्व पदक विजेता जैना शेकेरबेकोवा को 4-1 के विभाजित निर्णय से हराकर अपनी जीत सुनिश्चित की।

प्रीति के संघर्ष को साझा करते हुए उनके चाचा राजा विनोद सहित परिवार के अन्य सदस्य खुशी से फूले नहीं समा रहे। खुद बॉक्सिंग के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे राजा विनोद बताते हैं प्रीति ने घर में रहकर पढ़ाई के बाद बचा समय अपनी खेल प्रतिभा निखारने में लगाया। लॉकडाउन में जब हर तरफ सन्नाटा पसरा था वह अपने चाचा और पिता का सपना साकार करने के लिए दिन-रात पसीना बहा रही थी। घर में किट बैग पर मुक्के बरसाकर घंटों किया अभ्यास अब रंग लाया है। महज दो साल की यात्रा में उसने एशियन गेम्स में अपना पदक व ओलंपिक कोटा पक्का कर खुद को साबित कर दिखाया है। प्रीति से एशियन गेम्स के साथ ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
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बच्चों के भविष्य के लिए भिवानी से महम बस गए
प्रीति पंवार अपने तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी है। वह बीए सेकेंड ईयर की छात्रा है। छोटी बहन और भाई पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता सोमबीर हरियाणा पुलिस में एएसआई हैं। साथ ही वे कबड्डी के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे हैं। वह बताते हैं गांव बड़ेसरा में रहते हुए रोहतक में ड्यूटी के लिए समय पर आना मुश्किल होता था। बच्चों को भी अच्छी शिक्षा व सुविधाएं मुहैया नहीं हो रही थीं। इसलिए गांव से महम में आ बसे। यहां कोचिंग व अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। ड्यूटी पर भी समय से पहुंचना आसान हो गया है। प्रीति ने शानदार प्रदर्शन से पूरे परिवार का मान बढ़ाया है। उसने एशियन गेम्स में पदक के साथ ओलंपिक में खोलने का अवसर हासिल किया है। यह बड़ी उपलब्धि है। परिवार में कोई पहली बार विदेशी धरती पर खेलने जाएगा। यह गौरवांवित करने वाला पल है। मां सलीन भी होनहार बेटी की उपलब्धि से अभिभूत हैं।



तीन साल में जीते में कई पदक
प्रीति ने अपने पिछले करीब तीन साल के कॅरिअर में शानदार प्रदर्शन के बूते कई पदक जीते हैं। असम में आयोजित खेलो इंडिया में रजत पदक जीता। इस पहले पदक ने हौसला बढ़ाया तो 2021 में ही सोनीपत में आयोजित यूथ नेशनल में 57 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसी साल पंचकूला में आयोजित खेलो इंडिया के 57 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण व दुबई में आयोजित यूथ एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। वर्ष 2022 में सीनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। पहली बार वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए खेली व क्वालीफाई किया। रोमानियां की नंबर वन खिलाड़ी को हराया। क्वार्टर फाइनल में 3-2 के मुकाबले से हार से पदक रह गया। एशियन गेम्स के लिए पटियाला में लगे शिविर में पहुंचीं। यहां ट्रायल के दौरान हाल की वर्ल्ड चैंपियन एवं कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडल विजेता नीतू घणघस को हराने में कामयाब रहीं।
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