फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rohtak News: नगर परिषद के ईओ का एक तिहाई वेतन रोकने का आदेश

Thu, 26 Sep 2024 02:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
विज्ञापन
फोटो : 02रेवाड़ी। बावल चौक पर लगी ट्रैफिक लाइट। संवाद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


रेवाड़ी। शहर में ट्रैफिक लाइट मामले में अदालत के आदेश पर नियुक्त लोकल कमिश्नर ने जांच रिपोर्ट मंगलवार को अदालत में प्रस्तुत कर दी। इसमें ट्रैफिक लाइट दुरुस्त नहीं मिलने की बात कही गई है। मामले में सिविल जज मिताली अग्रवाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) का एक तिहाई वेतन रोकने का आदेश दिया।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि ईओ का एक तिहाई वेतन रोका गया या नहीं, इसकी रिपोर्ट 15 अक्तूबर तक न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी। ट्रैफिक लाइट प्रकरण में 16 अगस्त को जब कोर्ट में सुनवाई हुई थी तब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संदीप मलिक ने अपना बयान दर्ज कराया था कि ट्रैफिक लाइट को 15 दिन में सुचारू रूप से चला दिया जाएगा। 15 दिन बीतने के बाद भी नगर परिषद ने लाइट को दुरुस्त नहीं किया। इसके बाद अगली सुनवाई में सिविल जज ने लोकल कमिश्नर को नियुक्त कर ट्रैफिक लाइट की जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया। लोकल कमिश्नर ने 24 सितंबर को कोर्ट में जांच रिपोर्ट दी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी का एक तिहाई वेतन रोकने का आदेश दिया। यह भी कहा कि एक तिहाई वेतन बंद किया कि नहीं, इसकी रिपोर्ट 15 अक्तूबर तक न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।
विज्ञापन

अधिवक्ता एडवोकेट सुनील भार्गव ने बताया कि इससे पहले उन्होंने ट्रैफिक लाइट को लेकर गत वर्ष पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट में शिकायत दायर की थी। पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट ने ट्रैफिक लाइट को सुचारू रूप चलाने का आदेेश दिया था। नगर परिषद ने ट्रैफिक लाइट चालू नहीं की थी। इसके बाद सिविल जज की अदालत में इजरा दायर किया गया।

लोकल कमिश्नर की जांच में दुरुस्त नहीं मिली ट्रैफिक लाइट

लोकल कमिश्नर ने जब नगर परिषद की ओर से शहर में लगाई गई ट्रैफिक लाइट की जांच की तो पता चला कि ट्रैफिक लाइट ठीक से कार्य नहीं कर रही है। जांच के दौरान दोनों पक्षों के वकील मौजूद थे। कोर्ट के आदेश में नाई वाली चौक और अभय सिंह चौक का भी जिक्र था जहां ट्रैफिक लाइट नहीं लगाई गई थी। यहां भी टीम ने जांच की थी। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी की तरफ से जेब्रा क्रॉसिंग बनाने के आदेश दिए थे। जेब्रा क्रॉसिंग तो मिली जो काफी पुरानी थी। रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया। मामले में जब नगर परिषद के ईओ से पहले बातचीत की गई थी तो उन्होंने बताया था कि ट्रैफिक लाइट तो ठीक कर दी गई है, लेकिन टाइमिंग सेट करना बाकी है। कोर्ट में सुनवाई से पहले टाइमिंग सेट कर दी जाएगी।
विज्ञापन




24 लाख का ठेका, फिर दुरुस्त नहीं हुई ट्रैफिक लाइट
नगर परिषद को सरकार से बजट लेकर कार्य करवाना होता है। इसके बाद कार्य करवाने के लिए ठेकेदार को धनराशि दी जाती है। इस पूरे प्रकरण में दिलचस्प बात यह है कि नगर परिषद ने 24 लख रुपये का ठेका दिया था। इसकेबाद भी ट्रैफिक लाइट ठीक नहीं हो पाई। मामले में जब पहले कोर्ट में सुनवाई हुई थी तब कोर्ट ने भी नगर परिषद से पूछा था कि अगर ठेकेदार की गलती है तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है। हर बार कोर्ट में नगर परिषद की तरफ से टालमटोल जवाब दिया जाता था। मगर इस बार नगर परिषद के अधिकारी ही बुरी तरह फंस गए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें