03सीटीके02-दयानंद मठ में हुए वैदिक सत्संग में मुख्यवक्ता वैदिक आचार्य आर्य नरेश। स्रोत : मठ
रोहतक। आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से गोहाना अड्डा स्थित दयानंद मठ में प्रतिमास के प्रथम सप्ताह में होने वाले मासिक वैदिक सत्संग का शुभारंभ रविवार को सुबह 9 बजे यज्ञ के साथ किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य संतराम रहे। उन्होंने बताया कि परमपिता परमात्मा की आज्ञा का हमें कठोरता से पालन करना चाहिए। ऋषि-मुनि, महापुरुषों के बताए हुए मार्ग पर चलने का प्रयत्न करना चाहिए। मुख्यवक्ता के रूप में वैदिक आचार्य आर्य नरेश (हिमाचल प्रदेश) से रहे। आचार्य ने प्रवचन के माध्यम से मनुष्य के उत्तम जीवन के प्रमुख उद्देश्य पर विचार रखे। उन्होंने सर्वप्रथम वेदमन्त्र का उच्चारण किया। बताया कि हम सबका सौभाग्य है कि हमने आर्यावर्त देश में जन्म लिया है। जन्म के बाद महर्षि दयानंद सरस्वती का आशीर्वाद भी हम लोगों को प्राप्त हुआ है। तत्पश्चात् आचार्य प्रद्युम्न (हिमाचल प्रदेश) ने वर्तमान परिस्थिति और आर्यसमाज के प्रचार-प्रसार के संबंध में विस्तार से बताया कि हमें वेद प्रचार कार्यक्रम को और अच्छे तरीके से करना चाहिए, जिससे हमारे साथ अन्य लोग भी जुड़ सकें। सुभाष सांगवान प्रधान ने बताया कि हम सबको अपने महापुरुषों को याद करना चाहिए, जिनसे हमें प्रेरणा मिलती है। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती से संबंधित अनेक संस्मरण सुनाए तथा आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से आयोजित आर्य सम्मेलन 9-10 नवम्बर को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में पहुंचने के लिए सभी से निवेदन किया। सत्यनारायण आर्य, हनुमत मकडौली, दया आर्या एवं विनोद आर्य ने अपने भजनों के माध्यम से देश-भक्ति, भारत देश की वर्तमान दुर्दशा तथा ऋषिवर देव दयानंद की ओर से समाज के लिए किए गए उपकार आदि के बारे में संदेश दिया।