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कटड़ी की मौत होने पर पशुपालक बोला- लंपी चर्म रोग या स्वाइन फ्लू से जान जाने की आशंका

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वीरवार को एक कटड़ी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मौके के कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन पशुपालक का कहना है कि उसने लक्षण देखकर पशुपालन विभाग को सूचित किया था। पशुपालन विभाग की बड़ी लापरवाही के कारण सूचना मिलने के 15 घंटे बाद तक कोई चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचा।
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भिवानी चुंगी स्थित शेर विहार कॉलोनी निवासी रामप्रसाद ने बताया कि वह पशु पालता है। सामान्य दिनों की तरह वीरवार को उसकी करीब 19 महीने की कटड़ी चरने के लिए गई थी। दोपहर करीब एक बजे लौटी तो उसके शरीर पर मोटे-मोटे निशान थे। वह चारा खाया और पानी पीना बंद कर दिया। लंपी चर्म रोग का शक होने पर स्थानीय पशु चिकित्सक को सूचित किया, लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा। कुछ देर बाद कटड़ी के मुंह से खून बहने लगा। करीब सात बजे उसने दम तोड़ दिया।
पशुपालक का कहना है कि उनके आसपास के क्षेत्र में खाली प्लाटों में लंबे समय से मृत सूअर पड़े हुए हैं। कॉलोनीवासी स्वयं 50 से ज्यादा सूअरों को दफन कर चुके हैं। पशुपालक ने आशंका जताई कि उसकी कटड़ी की मौत का कारण स्वाइन फ्लू या लंपी चर्म रोग हो सकता है।
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पशुपालन विभाग के सह निदेशक ने किया गोशालाओं का निरीक्षण
वीरवार को पशुपालन विभाग के सह निदेशक डॉ. बीएस रांगी रोहतक पहुंचे। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति जानी। बैठक खत्म करने के बाद वे जिले की गोशालाओं का निरीक्षण करने पहुंचे। उप निदेशक डॉ. सूर्या खटकड़ ने बताया कि वीरवार को पहरावर, बहू अकबरपुर, मोखरा, कलानौर की गोशालाओं का निरीक्षण किया। गोवंशों को लगाई जा रही गॉट पॉक्स वैक्सीन के बारे में जानकारी ली।
पशुपालन विभाग को मिले पांच लाख रुपये
प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के लिए पांच-पांच लाख रुपये जारी किए हैं। डॉ. सूर्या खटकड़ ने बताया कि जिले को पांच लाख रुपये मिल चुके हैं। इन रुपयों से विभाग जरूरी दवा, केमिकल आदि खरीद सकता है। वहीं वीरवार को 43 हजार गॉट पॉक्स वैक्सीन की डोज पहुंची हैं। वीरवार शाम तक 17539 गोवंश को वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं। जिले में करीब 64 हजार गोवंश हैं।
करीब 12 दिन पहले इस्माईला में मिला था संदिग्ध बछड़ा
लंपी चर्म रोग का संदिग्ध मामला इस्माईला गांव में करीब 12 दिन पहले मिला था। हालांकि आधिकारिक तौर पर मामले की पुष्टि नहीं की गई थी। पशुपालक अशोक ने बताया था कि उसका करीब तीन साल का देसी नस्ल का बछड़ा है। उसके शरीर पर लंपी चर्म रोग के सभी लक्षण मिलने के बाद स्थानीय पशु चिकित्सक को सूचित किया था। विभाग की तरफ से कोई जांच या उपचार नहीं किया गया था। सांपला गोशाला की टीम ने गांव में जाकर बछड़े का उपचार किया था। हालांकि बछड़ा पांच दिन में स्वस्थ हो गया था।
लंपी चर्म रोग का कोई मामला सामने नहीं आया है। जिले में स्थिति काबू में है। पशुपालन विभाग की टीमें निरीक्षण कर रही हैं। - डॉ. सूर्या खटकड़, उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग
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