रोहतक। उच्चतम न्यायालय की सात सदस्यीय खंडपीठ की ओर से अनुसूचित जातियों के वर्गीकरण के निर्णय का बुधवार को एससी वर्ग-ए की 42 जातियों ने स्वागत किया। धानक, वाल्मीकि, खटीक, सांसी, ओड, बाजीगर, डूम, डेहा, मिरासी, सिकलीगर, सपेरा, पेरना, बादी व अन्य जातियों ने शहर के गोहाना अड्डा पर ढोल नगाड़ों के साथ लड्डू बांटकर खुशी जाहिर की।
अनुसूचित जाति वर्ग-ए महापंचायत के अध्यक्ष डॉ. स्वदेश कबीर ने कहा कि लंबे समय से आरक्षण के वर्गीकरण की लड़ाई लड़ रहे हैं। आरक्षण का 92 प्रतिशत लाभ केवल एक ही जाति विशेष को जाता रहा है। शेष 42 जातियां आरक्षण के लाभ से वंचित रही। वर्ष 1994 में न्यायाधीश गुरनाम सिंह की रिपोर्ट के बाद तत्कालीन भजनलाल सरकार ने आरक्षण का वर्गीकरण-ए व बी के रूप में किया। इसके बाद निचले तबके को भी आरक्षण का समान लाभ मिलने लगा। वर्ष 2006 में हुड्डा सरकार ने इसे समाप्त कर दिया। इस कारण फिर से वंचित जातियों को आरक्षण का लाभ मिलना बंद हो गया। इन जातियों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अब 18 वर्ष की लड़ाई के बाद एक अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि आरक्षण का लाभ वंचित जातियों को नहीं मिल पा रहा है। एक-दो जातियां ही सारा लाभ ले रही हैं। आरक्षण के वर्गीकरण को उचित ठहराते हुए इसके पक्ष में निर्णय सुनाया है। अब देश के 32 करोड़ वंचित वर्ग को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा।
इस मौके पर धर्मेंद्र हंस, पार्षद सुरेश किराड़, डॉ. चमत्कार नागर, भारतभूषण, देवी सिंह खटीक, राकेश कबीर, पालाराम सांसी, राज किराड़, सतीश भगत, मदन लाल, गोवर्धन दास, मोतीलाल नागर, ओम प्रकाश समेत अनेक लोग मौजूद रहे।