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Rohtak News: आकर्षण का केंद्र बनीं चार शिल्प पुरस्कार जीतने वाले बोंदवाल परिवार की कलाकृतियां

Mon, 06 Feb 2023 01:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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-फोटो 1 : सूरजकुंड मेले में अपनी कलाकृति के साथ राजेन्द्र बोंदवाल।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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बहादुरगढ़। कई दशक से बहादुरगढ़ का बोंदवाल परिवार हस्तशिल्प के क्षेत्र में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर रहा है। चंदन, कदम व दूसरी तरह की लकड़ियों पर हस्त कारीगरी में निपुण इस परिवार ने पारंपरिक कला को आगे बढ़ाया है। शुक्रवार से बोंदवाल परिवार की कृतियां सूरजकुंड में चल रहे अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में छाई हुई हैं। बोंदवाल परिवार के राजेंद्र प्रसाद की स्टॉल खुली है। उनके स्टॉल पर चंदन व दूसरी लकड़ी से बने लॉकेट, ब्रेसलेट, मालाएं, खिलौने, जानवरों की कृतियां, देवी-देवताओं की आकर्षक मूर्तियां मिल जाएंगी। मेले से लौटे दिल्ली के टीकरी गांव निवासी सुमित कुमार व नीरज ने बताया कि बोंदवाल परिवार की स्टॉल पर एक से बढ़कर कलाकृतियां हैं।
भारत सरकार अभी तक प्रदेश के छह शिल्पियों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। इनमें से 4 पुरस्कार अकेले बोंदवाल परिवार को मिले हैं। राजेंद्र ने बताया कि उनके भाई महावीर प्रसाद के बेटे चंद्रकांत को साल 2004 में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था। इससे पहले 1979 में उनके भाई महावीर प्रसाद बोंदवाल, 1996 में उनके पिता जयनारायण और 1984 में राजेंद्र बोंदवाल को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया जा चुका है।
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राजेंद्र को साल 2015 में राष्ट्रपति से शिल्प गुरु अवॉर्ड से नवाजा गया था। उन्हें यह अवॉर्ड एक लकड़ी के फ्रेम पर बेहद बारीक कला में चिड़िया व फूल-पत्ती बनाने के लिए दिया गया था। इसके अलावा वह दो साल के लिए उत्तरी अफ्रीका भी गए। वहां आईटीआई में छात्रों को लकड़ी की कारीगरी सिखाने के लिए सरकार की ओर से भेजा गया था। उनके भाई महावीर ने 16 हाथियों की एक बेल बनाई थी। यह कारीगरी उन्होंने एक ही पीस में की थी। उस कारीगरी के लिए उन्हें अवॉर्ड दिया गया था।
इसके अलावा, चंद्रकात को मेले की ओर से साल 2005 में कलामणि व वन पीस अंडर कट पैरेट बनाने के लिए सम्मानित किया गया था। साल 2009 में कलानिधि पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चंद्रकात को साल 2004 में यूनेस्को अवॉर्ड भी मिल चुका है।
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राजेंद्र के अनुसार, उनकी कलाकृतियों की मांग भारत ही नहीं विदेश में भी है। वह कहते हैं कि हस्तशिल्प बेहद मेहनत और बारीकी का काम है, जिसे बढ़ावा देने के लिए सरकार को और प्रयास करने चाहिए। चंद्रकांत बोंदवाल ने महात्मा बुद्ध की अस्थियों को रखने के लिए लकड़ी का बॉक्स भी तैयार किया, जिसमें भगवान बुद्ध की अस्थियों को रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका ले गए थे। नीरज बोंदवाल की बनाई गई इंचभर की ओखली, मटका, हांडी व जूती भी कला प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।

-फोटो 1 : सूरजकुंड मेले में अपनी कलाकृति के साथ राजेन्द्र बोंदवाल।

-फोटो 1 : सूरजकुंड मेले में अपनी कलाकृति के साथ राजेन्द्र बोंदवाल।

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