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Rohtak News: बेमौसम बारिश के बाद सताने लगे मच्छर, डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ा

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रोहतक। गर्मी की शुरुआत में ही मच्छरों ने परेशान करना शुरू कर दिया है। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश के बाद मच्छर तेजी से पनपने लगे हैं। ऐसे में डेंगू-मलेरिया का खतरा भी बढ़ गया है। बारिश गड्ढों व खाली प्लांटों में हुए जलभराव से मच्छर जनित रोगों के फैलने का अंदेशा बढ़ गया है। पिछले दो वर्षों से जिले में मच्छर जनित रोग नियंत्रण में हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के लिए इस वर्ष स्थिति नियंत्रण में बनाए रखना बड़ी चुनौती रहेगी।
मौसम में आए बदलाव व पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के चलते हाल ही में हुई बारिश ने किसानों की फसल में नुकसान करने के साथ हमारी संबंधी चिंता भी बढ़ा दी है। बारिश के बाद मौमस में बढ़ी ठंड व नमी ने मच्छरों के अनुकूल वातावरण बना दिया है। साथ ही गड्ढों व खाली प्लॉटों में भी पानी भर गया है। यहां मच्छर तेजी से पनप रहे हैं। यही नहीं, 15 अप्रैल के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने का अंदेशा है।
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पिछले वर्ष मलेरिया के तीन व डेंगू के 254 केस मिले थे। मच्छर जनित रोगों के बढ़ते खतरे के बीच जिले में डेंगू-मलेरिया के केसों का पिछले कुछ वर्षों में कम होना राहत भरा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले चार वर्षों में मलेरिया लगभग न के बराबर पहुंच गया है। डेंगू के केसों में भी कमी दर्ज की गई है। पिछले वर्ष जिले में मलेरिया के तीन व डेंगू के 254 केस मिले थे। मच्छर जनित रोगों से बचाव को लेकर विभाग ब्लड स्लाइड भी बना रहा है। पिछले वर्ष 156017 ब्लड स्लाइड बनाई गई।

मच्छर जनित रोगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। इसी कड़ी में लोगोें को जागरूक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छता के साथ मच्छर का लार्वा नहीं पनपने देने की जानकारी दी जा रही है। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में साफ-सफाई रखना जरूरी है। लोगों को भी इस ओर अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। - डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन।
कब कितने केस मिले
वर्ष मलेरिया डेंगू ब्लड स्लाइड
2018 71 396 147072
2019 13 300 146045
2020 06 221 112979
2021 00 469 133775
2022 03 254 156017
डेंगू बुखार :
डेंगू बुखार के सटीक लक्षण उम्र पर निर्भर करते हैं। आमतौर पर किसी व्यक्ति को संक्रमित मच्छर के काटे जाने के बाद 4-7 दिनों में बुखार के साथ लक्षण शुरू होते हैं। क्लासिक डेंगू के आम लक्षणों में तेज बुखार, 105 फॉरेनहाइट तक होना। मांसपेशियों और जोड़ों में गंभीर दर्द, सिर दर्द, छाती, पीठ या पेट पर लाल चकत्ते होना, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी, दस्त की शिकायत मुख्य हैं।
यह एक वायरल संक्रामक रोग है। यह एडीज मच्छर के काटने से होता है। सफेद काले धारीदार शरीर वाले इस मच्छर को टाइगर मोस्किटो भी कहते हैं। यह रोग चार संबंधित डेंगू विषाणुओं में से किसी के कारण होता है। इसमें डेन-1, डेन-2, डेन-3 और डेन-4 शामिल हैं। डेंगू बुखार को हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है। यह कभी-कभी गंभीर मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द का कारण बनता है।
डेंगू के लक्षण :
इलाज :यह एक जानलेवा मच्छर जनित रक्त रोग है। यह प्लास्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है। यह संक्रमित एनाफिलीज मच्छर के काटने से मनुष्यों में फैलता है। मानव शरीर में, परजीवी यकृत और फिर लाल रक्त कोशिकाओं में गुणात्मक तरीके से बढ़ते हैं। जटिल मलेरिया: इसमें गर्म, ठंडे और पसीने के चरणों के माध्यम से लक्षण आगे बढ़ते हैं। ठंड लगना या कंपकंपी के साथ ठंड का अहसास होना, सिरदर्द, बुखार और उल्टी, कभी-कभी, कम उम्र के व्यक्तियों में दौरे पड़ना, थकान या थकान के साथ सामान्य स्थिति (तापमान में) पर लौटने के बाद पसीना आना मुख्य लक्षण हैं।
मरीज को पर्याप्त आराम करना जरूरी है। तरल पदार्थ पीना व जरूरत पड़ने पर दर्द निवारक दवा लें। कभी-कभी यह रक्तस्रावी बुखार का कारण बन सकता है। इसमें छोटी रक्त वाहिकाओं का रिसाव होता है और पेट और फेफड़ों में तरल पदार्थ भर जाता है। ऐसे मामलों में, तुरंत चिकित्सा से संपर्क करना जरूरी है।
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मलेरिया: लक्षण:
मलेरिया के लक्षणों को जटिल मलेरिया और गंभीर मलेरिया दो श्रेणियों में बांटा गया इै।
गंभीर मलेरिया: प्रयोगशाला या नैदानिक साक्ष्य महत्वपूर्ण अंग की शिथिलता की ओर इशारा करते हैं, तो यह गंभीर मलेरिया है। बुखार और कंपकंपी, ठंड लगना, सांस लेने में तकलीफ और गहरी सांस लेना, एनीमिया और असामान्य रक्तस्राव के लक्षण, महत्वपूर्ण अंग की शिथिलता और नैदानिक पीलिया के साक्ष्य मुख्य लक्षण हैं।
इलाज: इसके उपचार में मलेरिया-रोधी और एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं।
यूं करें बचाव -
लंबे समय पानी जमा न रहनें दें।
- गड्ढों में भरे पानी पर तेल डालें।
- फ्रीज के पीछे की ट्रे साफ रखें।
- पक्षियों के पेयजल बर्तन साफ रखें।
- घर व आसपास साफ सफाई रखें।
- पेयजल बर्तनों को ढक कर रखें।
- गड्ढों में पानी जमा न होने दें।
- वाशबेसिन में पानी जमा न होने दें।
- टायरों में पानी जमा न होने दें।
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