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Rohtak: चार घंटे अटकी रही बंदर के बच्चे की 'जान', प्रशासन ने झाड़ा पल्ला, लोगों ने साहस दिखा बचाया

Tue, 27 Jun 2023 12:12 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

अंधेरा होने पर लोगों ने साहस दिखाकर खुद बंदर को निकाला। वन्यप्राणी विभाग व नगर निगम के अधिकारियों ने पल्ला झाड़ दिया। जजपा नेता ने बताया कि उन्होंने डीसी कैंप कार्यालय में फोन किया। वहां से वन्य प्राणी विभाग का नंबर दिया गया। 
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बंदर के बच्चे को रस्सी से छुड़ाने का प्रयास करते अन्य बंदर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा के रोहतक शहर के आर्य नगर में डेयरी कारोबारी के मकान की टंकी के पास सोमवार को चार घंटे तक बंदर का बच्चा रस्सी में उलझकर फंस गया। वन्य प्राणी विभाग से लेकर, नगर निगम और पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए। आखिर में रात आठ बजे लोगों ने एकत्रित होकर बंदरों को लाठियों से भगाकर बंदर के बच्चे को बचाया।

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नगर निगम के मनोनित पार्षद एवं जजपा के हलका अध्यक्ष राजेश सैनी ने बताया कि आर्य नगर में ग्रीन रोड पर सैनी वाली गली में डेयरी मालिक देवेंद्र का मकान है। मकान की छत पर रखी पानी की टंकी के पास रस्सी में उलझकर फंस गया। रस्सी उसके पेट के चारों तरफ लिपट गई, जिससे वह निकल नहीं सका।

उसकी चीख-पुकार सुनकर 15 से 16 बंदर एकत्रित हो गए। लोग नजदीक जाकर बंदर निकालने का प्रयास करते तो बंदर उनके ऊपर हमला कर देते। आखिर में रात आठ बजे शांतनु, शेरदिल, अमित सहित अन्य युवाओं के सहयोग से बंदर को किसी तरह जाल से निकाला जा सका।
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वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी बोले, उनके एक्ट से बाहर हुए बंदर
जजपा नेता ने बताया कि उन्होंने डीसी कैंप कार्यालय में फोन किया। वहां से वन्य प्राणी विभाग का नंबर दिया गया। वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि तीन-चार माह पहले वन्य प्राणी एक्ट के तहत बंदर की जिम्मेदारी उनकी नहीं रही। ऐसे में वे कुछ नहीं कर सकते। इसके बाद पुलिस से संपर्क किया, पुलिस ने भी मना कर दिया।

नगर निगम में नहीं एक्सपर्ट, ठेकेदार ही पकड़ता हैं बंदर
निगम पार्षद ने बंदर को बचाने के लिए नगर निगम के सफाई इंस्पेक्टर सुंदर से बात की। सुंदर ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई एक्सपर्ट या संसाधन नहीं हैं, जिससे बंदर को निकाला जा सके। निगम समय-समय पर ठेका देकर बंदरों को पकड़वाता है। ठेकेदार भी शहर में नहीं है।

निगम पार्षद का फोन आने के बाद उन्होंने वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों से बात की। अधिकारियों को पहले ही बंदर को बचाने के लिए टीम भेजनी चाहिए थी। हालांकि बाद में समझाने पर मान गए थे। इसी बीच लोगों ने खुद की बंदर को बचा लिया। -मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम

उनके पास पत्र आया हुआ है। अब शहर में नगर निगम व गांवों में पंचायतों को बंदरों को पकड़ने के लिए वन्य प्राणी विभाग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। दोनों विभाग अपने स्तर पर निर्णय लें। बंदर के फंसे होने की सूचना आई थी। वे मेयर के आग्रह पर जाने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन बंदर को पहले ही लोगों ने बचा लिया। -देवेंद्र हुड्डा, अधिकारी वन्य प्राणी विभाग

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