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Rohtak News: स्कूलों में लगीं मासिक धर्म स्वच्छता मशीनें बंद, बीमार हो रहीं बेटियां

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नंदिनी शर्मा
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रोहतक। प्रधानमंत्री के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे को सरकारी दफ्तरों में बैठे अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल रोहतक जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियों का भी है। इन अधिकारियों की उदासीनता के चलते जिले की आठ हजार से ज्यादा छात्राएं मासिक धर्म के दौरान होने वाली दिक्कतों को झेलने के लिए मजबूर हैं। राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान उचित स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए विभाग ने सैनिटरी नैपकीन इंसीनरेटर मशीनें लगवाईं थीं, लेकिन इसके बाद इन मशीनों को देखना भी उचित नहीं समझा। 118 स्कूलों में लगीं यह मशीनें कई सालों से खराब होकर बंद पड़ीं हैं। हर रोज करीब आठ हजार छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को छात्राओं ने कई बार जिम्मेदारों के सामने रखा, लेकिन उनकी समस्या हल नहीं की गई। छात्राओं का कहना है कि स्कूल के शौचालयों में स्वच्छता की कमी रहती है। इसका परिणाम यह है कि उन्हें सैनिटरी नैपकीन को नष्ट करने के लिए पेपर या पॉलीथिन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे छात्राओं में बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। छात्रा तान्या ने बताया कि इंसीनरेटर मशीन पिछले कई सालों से बंद पड़ी है। इस मशीन के लगने के कई दिनों बाद हमें पता चला कि स्कूल में इस प्रकार की मशीन उपलब्ध है, लेकिन कभी उसका उपयोग नहीं किया। छात्रा अंशिका ने बताया कि पिछले तीन सालों से यह मशीनें बंद हैं। इसके कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूल में दो मशीनें लगी हुई हैं इसमें सैनिटरी नैपकीन पैड वेंडिंग मशीन भी है, जिसमें सिक्का डालकर सैनिटरी पैड लिया जा सकता है, लेकिन कई सालों से वह मशीन भी खराब है।
ये है सैनिटरी नैपकीन इंसीनरेटर मशीनें का उपयोग
मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के लिए इस मशीन का उपयोग किया जाता है। यह मशीन बिजली के माध्यम से चलती है जो कि सैनिटरी पैड को नष्ट करने का काम करती है। मशीन के जरिए ही सैनिटरी नैपकीन को नष्ट कर राख बनाया जाता है।
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स्कूलों में इंसीनरेटर मशीनों के रख-रखाव की जिम्मेदारी स्कूल मुखिया की होती है। अगर मशीनों में किसी प्रकार की दिक्कतें आती है तो विभाग में शिकायत की जिम्मेदारी उनकी होती है। मशीनें लगने के बाद से विभाग के पास स्कूलों की तरफ से किसी प्रकार की शिकायत नहीं दी गई है। अगर विभाग को शिकायत प्राप्त होती है तो जिम्मेदार अधिकारी को निर्देश दिए जाएंगे।
मनजीत मलिक, डीपीसी
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