रोहतक। तीन दशक पहले हुए महम कांड में सोमवार को भी एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। क्योंकि दोनों पक्ष बहस के लिए तैयार नहीं थे। अब मामले में अदालत ने 22 जनवरी को बहस के लिए तिथि तय की है। मामले के अनुसार भिवानी जिले के गांव खरक जाटान निवासी रामफल ने तीन साल पहले अदालत में सीआरपीसी की धारा 397 के तहत याचिका दायर की। दायर इस्तगासे के मुताबिक याचिकाकर्ता का कहना है कि 27 फरवरी 1990 को महम विधानसभा के उपचुनाव में उसके बड़े भाई हरि सिंह की मौत हो गई थी। इसके लिए अभय चौटाला, पूर्व डीआईजी शमशेर सिंह अहलावत, करनाल के पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र, भिवानी के डीएसपी रहे सुखदेव राज राणा व गांव दरियापुर के भूपेंद्र उर्फ भूपी, हिसार के गांव दौलतपुर निवासी पप्पू और फतेहाबाद जिले के गांव गिल्ला खेड़ा निवासी अजीत सिंह जिम्मेदार हैं। आरोपियों के खिलाफ अदालत में केस चलाया जाएगा। महम अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके चलते याचिकाकर्ता ने रोहतक स्थित सेशन कोर्ट में अपील की थी। सेशन कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किए थे। हालांकि जिन पर याचिकाकर्ता ने आरोप लगाए हैं, उनमें से दो का निधन हो चुका है। पूर्व डीआईजी शमशेर सिंह का तो महम पुलिस मृत्यु प्रमाण पत्र तक कोर्ट में जमा करवा चुकी है।