वह घर पर रहकर बेटी को संभालती थी। इसी बीच घर पर कोई आता तो यह कहता कि बेटी, लंदन पढ़कर आई है, कहीं नौकरी क्यों नहीं करती। यह बात उसे महसूस हो गई। उसकी नेकीराम कॉलेज में सहायक प्रोफेसर की नौकरी लग गई, लेकिन हरियाणा की देसी भाषा को लेकर उसे दिक्कत आई। उसे महसूस हुआ कि वह अपनी नौकरी से न्याय नहीं कर पा रही। इसलिए 2016 में लॉ की परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।
2017 में उप जिला न्यायवादी (एडीए) लग गई। उसे जींद में पोस्टिंग मिली। 2020 में उसने यूपी हाई ज्यूडिशियल की परीक्षा दी। जुलाई 2022 में परीक्षा का परिणाम आया। 1 व 2 अगस्त को प्रयागराज में साक्षात्कार हुए। अब 12 सितंबर को परीक्षा का फाइनल परिणाम आया है, जिसमें उसने पहला स्थान प्राप्त किया है।
मेरी तैयारी के लिए पति ने छोड़ दी नौकरी
मंजूबाला ने बताया कि उसकी कामयाबी के पीछे पति सुमित अहलावत का अहम योगदान है। वे नोएडा के एक निजी बैंक में सीनियर मैनेजर थे। उसने देखा कि बेटी के बाद बेटा होने के कारण मैं पढ़ाई नहीं कर पा रही हूं, तो उसने अपनी नौकरी छोड़ दी। बोले, आप परीक्षा की तैयारी करो, मैं बच्चों को संभालूंगा।