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Rohtak News: चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई व 50 लाख रुपये मुआवजे के लिए 30 घंटे से सड़क पर रखा मनीष का शव

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माई सिटी रिपोर्टर
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रोहतक। शहर के शीला बाईपास चौक स्थित निजी अस्पताल में रक्तदान करने के दो घंटे बाद दम तोड़ने वाले मनीष के परिजन पिछले 30 घंटे से धरने पर बैठे हैं। आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई, परिवार के एक सदस्य को नौकरी व 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग पर अड़े परिजनों की दूसरे दिन भी सुनवाई नहीं हुई। परिजनों ने प्रशासन को दोपहर 12 बजे बाद अस्पताल के बाहर शव का संस्कार करने व सीएम का घेराव करने की चेतावनी भी दी। इसके बाद धरना स्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। रात करीब दस बजे शव रखे फ्रीजर की बिजली सप्लाई काटे जाने के बाद माहौल तनाव पूर्ण बन गया। यहां देर रात पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल पीड़ित परिवार के बीच पहुंची और उन्हें ढाढस बंधाया।

सोनीपत के गांव मुंडलाना निवासी मनीष की रक्तदान के बाद हुई मौत का मामला सुलझ नहीं रहा है। चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर परिजन मंगलवार रात साढ़ दस बजे बाद भी अस्पताल के सामने धरने पर बैठे हैं। बरोदा के विधायक इंदुराज नरवाल भी रात परिजनों के बीच पहुंचे थे। यही नहीं, बुधवार रात गीता भुक्कल भी इनके बीच पहुंची। धरने के बावजूद दिन भर किसी तरह की कार्रवाई होते न देख, गुस्साए परिजनों ने दोपहर करीब 12 बजे प्रशासन को 1:30 बजे तक का अल्टीमेट दिया। इसके बाद अस्पताल के बाहर शव का अंतिम संस्कार कर मुख्यमंत्री का घेराव करने की चेतावनी दी गई। धरना स्थल पर दी गई इस चेतावनी के बाद हाई अलर्ट पर आए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करते हुए पुलिस बल बढ़ा दिया। इसके बाद रात साढ़े दस बजे तक परिजन धरने पर बैठे रहे। इस दौरान दिन में एक बार महम एसडीए दबलीर सिंह उनसे बात करने आए। यहां बातचीत के बावजूद किसी तरह का समाधान नहीं हुआ। इससे पूर्व डीएसपी रवि खुंडिया वहां आए तो प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी कर दी। इसके बाद वे वापस लौट गए।
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इधर, रात को किसी ने शव रखे फ्रीजर की बिजली सप्लाई का तर काट डाला। इसके बाद शव खराब होने से बचाने के लिए जनरेटर लाने की तैयारी हुई। पुलिस ने परिजनों को जनरेटर लाने मना किया तो परिजन बिफर पड़े। इसके चलते रात पुलिस व प्रदर्शनकारियों में बहसबाजी के साथ तनाव और बढ़ गया। पुलिस ने सड़क की एक ओर से टेंट हटा कर लोगों को आने जाने के लिए रास्ता मुहैया कराया। जबकि दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी अभी भी जमे हुए हैं।

यह है ममाला
गौरतलब है कि शीला बाइपास स्थित सनफ्लैग अस्पताल में सोमवार को मनीष रक्तदान करने आया था। इसके दो घंटे बाद उसकी मौत हो गई। इससे आहत परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से बात की, मगर उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके चलते परिजन शव लेकर अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। पिछले 24 घंटे से धरना व प्रदर्शन जारी है।
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रक्तदान जान बचाता है लेता नहीं
रक्तदान करना हर तरह से बेहतर है। यह स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद होने के साथ आपात स्थिति में मरीज के लिए भी संजीवनी समान है। रक्तदान करने वाला भी सुरक्षित रहता है। रक्तदाता को रक्तदान से किसी तरह का कोई खतरा नहीं होता है। समय-समय पर रक्तदान से रक्तदाता का शरीर स्वस्थ रहता है। साथ ही छिपे हुए रोगों का भी समय रहते पता लग जाता है। पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक में दान किए गए रक्त की छह तरह की जांच की जाती है। इससे काला पीलिया समेत अन्य खतरनाक रोगों का समय पर पता लगने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
देवेंद्र चहल, सचिव, रेडक्रॉस सोसायटी।
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