प्लामोडियम वाइवैक्स सामान्य है। इसका बचाव और उपचार संभव है। वर्ष 2021 में दुनिया में 247 मिलियन लोग मलेरिया से प्रभावित हुए। यह सीधे तौर पर लोगों को आर्थिक रूप से भी प्रभावित करता है। मादा एनाफिलीज मच्छर ही मलेरिया का कारक बनती है। यह अपने 30 दिन के जीवन में दो से चार बार साफ पानी पर अंड़े देती है।
कुनैन की दवा उपलब्ध
मादा एनाफिलीज बीमार को काटते यानी खून चूसते समय प्लाजमोडियम अंदर ले जाती है। किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटने पर यह प्लाजमोडियम उसमे छोड़ देती है। इससे वह संक्रमित हो जाता है। मलेरिया से बचाव के लिए हमारे यहां कुनैन की दवा उपलब्ध है। इसके अलावा और वैक्सीन बनाना भी संभव है। मलेरिया वैक्सीन व जीन बदलने के मानक दिए हैं। अब इससे आगे शोध की जरूरत है।
शोध में पहचाने ये दो अहम मानक
मलेरिया से निपटने के लिए दो तरह की वैक्सीन पर दुनिया में काम चल रहा है। इनमें से एक मानव शरीर में मलेरिया का परजीवी विकसित ही न हो और दूसरा तरीका वैक्सीन लगवाने वाले को मच्छर काटने के बाद किसी अन्य को मलेरिया नहीं होगा। इसके अलावा तीसरा तरीका शोधार्थी खोजने में जुटे हैं। इसे जीएमएम यानी जेनेटिकली मोडिफाइड मॉस्किटो कहा गया है। इसमें मच्छर के जीन को बदल दिया जाता है। ऐसे मच्छर की प्रजाति या नई पीढ़ी मलेरिया फैलाने लायक ही नहीं रहेगी।