रोहतक। विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित चार हलकों के 56 प्रत्याशियों का फैसला आज होगा। जाट शिक्षण संस्थान में चारों हलकों की मतगणना होगी। दोपहर तक साफ हो जाएगा कि गढ़ी सांपला-किलोई हुड्डा का गढ़ कायम रहेगा, महम में दांगी, कुंडू या राधा में से कौन विजयी रहेगा। रोहतक शहर के रण में उतरे भारत भूषण बतरा व मनीष ग्रोवर में से किसके सिर पर जीत का सेहरा बंधेगा। कलानौर में शकुंतला खटक के विजयी रथ को भाजपा की रेनू डाबला रोक पाती है या नहीं। सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। 10 बजे के करीब रुझान व 12 बजे तक चुनाव परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।
रोहतक शहर : बतरा आगे रहेंगे या ग्रोवर बराबरी करेंगे
भाजपा के पितामह डॉक्टर मंगलसेन और कांग्रेस के बतरा बंधुओं का गढ़ रहे रोहतक शहर में कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। कांग्रेस के भारत भूषण बतरा दो बार ग्रोवर को हरा चुके हैं, जबकि एक बार हार चुके हैं। अब मंगलवार को बतरा 3-1 से आगे होंगे या ग्रोवर जीत के साथ 2-2 से स्कोर करेंगे। 1947 में बंटवारे के बाद आए पंजाबी समुदाय के लोगों का अब तक दबदबा रहा है। अब तक केवल वैश्य समुदाय से सेठ श्री किशन दास गैर पंजाबी विधायक बने। 1952 से 2014 तक हर बार पंजाबी समुदाय से ही विधायक बनता आ रहा है। चाहे वह भाजपा से हो या कांग्रेस से। सीट पर भाजपा के डॉक्टर मंगलसेन का दबदबा रहा है। उन्होंने 1957 से 1987 तक नौ चुनाव लड़े, सात में जीत हासिल की। उनके देहांत के बाद कांग्रेस के बतरा बंधुओं ने जीत हासिल की। 1990 से लेकर 2014 तक केवल 1996 व 2014 में बतरा बंधु हारे हैं। 10 साल कांग्रेस ने रोहतक की चौधर का नारा देकर राज किया, लेकिन 2014 में भाजपा के मनीष ग्रोवर जीत गए। बतरा ने 2019 में ग्रोवर को मात देकर हार का बदला ले लिया। 2024 में फिर दोनों आमने-सामने हैं।
हलका रोहतक रोहतक
वर्ष विजेता पार्टी
1952 देवराज सेठी कांग्रेस
1957 डाॅक्टर मंगलसेन जनसंघ
1962 डाॅक्टर मंगलसेन जनसंघ
1967 डाॅक्टर मंगलसेन जनसंघ
1968 डाॅक्टर मंगलसेन जनसंघ
1972 सेठ किशन दास कांग्रेस
1977 डाॅक्टर मंगलसेन जनसंघ
1982 डाॅक्टर मंगलसेन भाजपा
1985 उप चुनाव सेठ किशन दास कांग्रेस
1987 डाॅक्टर मंगलसेन भाजपा
1991 सुभाष बतरा कांग्रेस
1996 सेठ किशन दास हविपा
2000 शादीलाल बतरा कांग्रेस
2005 शादीलाल बतरा कांग्रेस
2009 भारत भूषण बतरा कांग्रेस
2014 मनीष ग्रोवर भाजपा
2019 भारत भूषण बतरा कांग्रेस
गढ़ी सांपला-किलोई : 24 साल से हुड्डा अजेय
10 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री व चार बार सांसद रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा 2000 से गढ़ी सांपला-किलोई से जीत रहे हैं। विपक्ष अब तक उनको कांटे की टक्कर भी नहीं दे पाया है। 1982 से अब तक के राजनीतिक सफर में हुड्डा केवल चार बार 1982 और 1987 में किलोई से विधानसभा और 1999 में रोहतक व 2019 में सोनीपत लोकसभा सीट हारे हैं। 2000, 2005, 2009 व 2014 से वे लगातार किलोई हलके से विधायक हैं। इससे पहले 1991, 1996, 1998 में रोहतक लोकसभा सीट से ताऊ देवीलाल को हराकर प्रदेश की राजनीति का बड़ा चेहरा बनकर उभरे थे। अगर वे कांग्रेस को दोबारा सत्ता में लाकर मुख्यमंत्री बनते हैं तो 10 साल बाद प्रदेश में रोहतक की चौधर लौटेगी। दूसरी तरफ जिला परिषद की चेयरपर्सन रहीं मंजू हुड्डा ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। अगर बड़ा उलटफेर हुआ तो मंजू का राजनीतिक ग्राफ शिखर पर पहुंच जाएगा। हालांकि इसकी संभावना न के बराबर है।
हलका गढ़ी सांपला-किलोई
कौन कब किस हलके से बना विजेता
वर्ष विजेता पार्टी
1952 चौधरी माड़ू सिंह जमींदार पार्टी
1957 सूरजभान निर्दलीय
1962 चौधरी रामस्वरूप हरियाणा लोक समिति पार्टी
1967 महंत श्रेयोनाथ निर्दलीय
1968 चौधरी रणबीर हुड्डा कांग्रेस
1972 महंत श्रेयोनाथ कांग्रेस (एस)
1977 हरिचंद हुड्डा जनता पार्टी
1982 हरिचंद हुड्डा लोकदल
1987 श्रीकृष्ण हुड्डा लोकदल
1991 कृष्णमूर्ति हुड्डा कांग्रेस
1996 श्रीकृष्ण हुड्डा एसएपी
2000 भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस
2005 भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस (उप चुनाव)
2009 भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस
2014 भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस
2019 भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस
महम : दांगी, कुंडू व राधा में टक्कर, भाजपा का नहीं खुला खाता
1990 के महम कांड से देश व प्रदेश की राजनीति में सुर्खियों में आए महम के हलके से जनसंघ के समय से लेकर आज तक भाजपा नहीं जीती है। अब अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी दीपक हुड्डा से आस है। हालांकि मुकाबला कांग्रेस के बलराम दांगी, हजपा के बलराज कुंडू व निर्दलीय राधा अहलावत के बीच है। आप के विकास नेहरा व इनेलो के पूर्व विधायक बाली पहलवान भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकते हैं। कांग्रेसी होने के बावजूद बलराम दांगी के पिता आनंद सिंह दांगी ताऊ देवीलाल के राजनीतिक शिष्य रहे हैं। पिछला विधानसभा चुनाव निर्दलीय बलराज कुंडू से हारने वाले आनंद सिंह दांगी ने अबकी बार बेटे को मैदान में उतारा है। बलराम के लिए भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र व आशा हुड्डा तक ने प्रचार किया। मतदान के दिन दांगी के पैतृक गांव मदीना में दांगी व कुंडू के बीच झड़प भी सामने आई। अब शनिवार को फैसला होगा कि महम चौबीसी का ताज किसके सिर सजेगा।
महम हलका
वर्ष विजेता पार्टी
1962 रामधारी हरियाणा लोक समिति
1967 प्रोफेसर महासिंह निर्दलीय
1968 राजसिंह दलाल निर्दलीय
1972 उमेद सिंह निर्दलीय
1977 हरस्वरूप बूरा जनता पार्टी
1982 चौधरी देवीलाल लोकदल
1985 चौधरी देवीलाल लोकदल
1987 चौधरी देवीलाल लोकदल
1991 आनंद सिंह दांगी कांग्रेस
1996 बलबीर सिंह बाली इनेलो
2000 बलबीर सिंह बाली इनेलो
2005 आनंद सिंह दांगी कांग्रेस
2009 आनंद सिंह दांगी कांग्रेस
2014 आनंद सिंह दांगी कांग्रेस
2019 बलराज कुंडू, निर्दलीय
कलानौर : प्रेम प्रधान के सहारे डाबला के सामने खटक का विजयी रथ रोकने की चुनौती
जिले के एकमात्र आरक्षित हलके कलानौर से भाजपा प्रत्याशी रेनू डाबला के लिए कांग्रेस प्रत्याशी शकुंतला खटक का विजयी रथ रोक पाना, यक्ष प्रश्न बना हुआ है। रोहतक निगम की पूर्व मेयर रेनू डाबला के अलावा हलके से निर्दलीय प्रत्याशी प्रेम प्रधान भी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि जाट बहुल गांव बलियाना, खेड़ी साध, सुनारिया कलां, सुनारिया खुर्द, करौथा, मायना, बालंद, रिटौली, कबूलपुर से लेकर दूसरे गांवों में खटक को ज्यादा वोट मिले हैं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी प्रेम प्रधान कलानौर कस्बे के अलावा हलके से समुदाय विशेष के वोट लेने में कामयाब हो सकते हैं। भाजपा प्रत्याशी रेनू डाबला को पार्टी के मूल वोट बैंक के अलावा रोहतक निगम के एक से छह वार्ड से ज्यादा उम्मीद है, जहां उन्होंने मेयर रहते हुए काम करवाए हैं। बता दें कि शकुंतला खटक भाजपा के रामअवतार वाल्मीकि को हराकर जीत की हैट्रिक लगा चुकी हैं। रामअवतार की जगह अबकी बार भाजपा ने रेनू डाबला को टिकट दिया था। हलके से कांग्रेस, भाजपा सहित 13 प्रत्याशी मैदान में रहे। हलके के सियासी इतिहास पर नजर डालें तो यह अर्धशहरी हलका 1977 से पहले सामान्य था। उस समय हलके के अंदर विस्थापित होकर आए पंजाबी समुदाय की अच्छी सियासी मौजूदगी थी। कलानौर करतारी के नाम से प्रसिद्ध रहा है, हलका कभी किसी का गढ़ नहीं रहा। दलित समुदाय की राजनीति का गढ़ बजे हलके से कांग्रेस की करतारी देवी ने सात चुनाव लड़े, जिसमें चार बार जीती। 2009 में करतारी देवी के देहांत के बाद सीट से कांग्रेस ने शकुंतला खटक को मैदान में उतारा, जो तीन बार चुनाव जीत चुकी हैं।
कलानौर :
वर्ष विजेता पार्टी
1952 चौधरी बदलूराम .....
1957 नान्हूराम .....
1962 चौधरी रणबीर हुड्डा कांग्रेस
1967 ठाकुर नसीब सिंह जनसंघ
1968 संतराम दास बत्रा जनसंघ
1972 संतराम दास बत्रा कांग्रेस
1977 जयनारायण खुंडिया जनता पार्टी
1982 करतार देवी कांग्रेस
1987 जयनारायण खुंडिया भाजपा
1991 करतार देवी कांग्रेस
1996 करतार देवी कांग्रेस
2000 सरिता नारायण भाजपा
2005 करतार देवी कांग्रेस
2009 शकुंतला खटक कांग्रेस
2014 शकुंतला खटक कांग्रेस
2019 शकुंतला खटक कांग्रेस