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Rohtak News: चुनावी ड्यूटी पर पीजीआई के एलटी, चार दिन बढ़ेगी मरीजों की मुश्किल

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पीजीआईएमएस में इलाके के लिए आने वाले मरीजों के लिए आने वाले चार दिन मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं। इसकी वजह यहां के लैब टेक्नीशियन (एलटी) का लोकसभा चुनाव में ड्यूटी पर जाना है। पहले दो दिन संस्थान के करीब 80 प्रतिशत एलटी चुनावी रिहर्सल पर रहेंगे। इसके बाद दो दिन मतदान की ड्यूटी पर रहेंगे। ऐसे में मरीजों के सैंपल लेना व जांच का काम प्रभावित होना तय है। इससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ेगी।
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प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस में वर्तमान में 185 एलटी तैनात हैं। इनमें से 140 चुनावी ड्यूटी के लिए चुने जा चुके हैं। उन्हें 13, 14 व 24, 25 मई को चुनाव ड्यूटी पर रहने का सरकारी फरमान मिला है। पहले दो दिन इन्हें चुनावी रिहर्सल में शामिल होना है। यहां उन्हें चुनावी जिम्मेदारी की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद दो दिन चुनावी ड्यूटी निभानी है। ऐसे में संस्थान व इसके करीब 60 हजार से अधिक मरीज चार दिन महज 20 प्रतिशत एलटी के भरोसे रहेंगे। इन्हें ही ओपीडी, आपात विभाग, ट्राॅमा सेंटर व ऑपरेशन थियेटर में मरीजों के सैंपल लेने होंगे। यही नहीं, इन सैंपलों की जांच का काम भी लैब में एलटी ही संभालते हैं। ऐसे में सैंपलों की जांच भी यही स्टाफ करेगा। नतीजतन संस्थान का सारा कार्यभार करीब 45 कर्मचारियों के कंधों पर रहेगा। काम के इस अतिरिक्त भार के चलते सैंपल या रिपोर्ट गलत होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। या यूं कहें की मरीजों की परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है।
दबी आवाज में विरोध कर रहे कर्मचारी
चुनावी ड्यूटी को लेकर संस्थान के एलटी में खासा रोष है। वे दबी आवाज में इसका विरोध भी कर रहे हैं। कर्मचारियों ने इस संदर्भ में सोमवार को स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनीता सक्सेना से मिलकर शिकायत करने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की ओर से स्वास्थ्य कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी में शामिल नहीं किए जाने की राहत दी गई है। इसके बावजूद पीजीआई के 80 प्रतिशत एलटी की चुनावी ड्यूटी लगाई गई है।
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लोकसभा चुनाव को लेकर पीजीआई के 80 प्रतिशत एलटी की ड्यूटी लगा दी गई है। आयोग के नियम ही ड्यूटी से अलग रखने की बात कहता है। यह ड्यूटी भी चार दिन रहेगी। पहले दो रिहर्सल व दो दिन चुनाव कराने में लगेंगे। इन चार दिनों में संस्थान के करीब 6000 मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ेगी। इसलिए आयोग एलटी को राहत दे। - सतीश सोनी, प्रधान, मेडिकल लेबोरेट्री टेक्निकल सोसायटी पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय।
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