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Rohtak News: बार-बार धान की फसल बोने से बंजर हो रही जमीन

Sat, 17 Jun 2023 03:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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अजमेर गोयत। महम। बार-बार धान की फसल से जमीन बंजर होने की कगार पर है। आज धान लगाना मजबूरी हो सकती है, लेकिन यह कल के भविष्य पर ग्रहण लगा सकती है। क्योंकि धान की खेती में फसल पकने तक पानी खड़ा रहने से धीरे-धीरे जमीन बंजर होने का सिलसिला शुरू हो जाता है। सामूहिक रूप से धान की फसल को त्याग कर ही जमीन की उपजाऊ शक्ति को बचाया जा सकता है।
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बहुत ही कम ही किसान जानते हैं, कि खेत में पानी खड़ा रहने से जमीन बंजर हो सकती है। कुछ किसानों को अगर इस बारे में जानकारी है भी तो वे आसपास के किसानों द्वारा धान की खेती करने के कारण स्वयं भी धान लगाने को मजबूर हैं। धान में जहां पानी की अधिक खपत होती है, वहीं पानी खड़ा रहने से उस जमीन की उपजाऊ शक्ति कमजोर हो जाती है। वैज्ञानिकों द्वारा समय-समय पर किसानों को सामूहिक रूप से धान की खेती छोड़ने की सलाह दी जा रही है। डार्क जोन में पानी के निरंतर दोहन से जमीन के अंदर पानी का स्तर भी लगातार गिरता जा रहा है।

सूखे की स्थिति में भी ली जा सकती है बाजरे की फसल
कृषि विभाग के डीडीए महावीर सिंह ने बताया कि बाजरे की फसल कम बारिश में भी उगने वाली फसल है। हरियाणा में जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की बरसात होती है। लेकिन 15 जुलाई से लेकर सितंबर तक अगर बारिश नहीं होती है या मानसून आने में देर होती है तो ऐसी स्थिति में किसानों को कम पानी में होने वाली फसलें बोने की सलाह दी जाती है। इनमें मुख्य रूप से बाजरा की फसल ली जा सकती है। सितंबर में बारिश होती है तो किसानों को सरकार द्वारा तोरिया आदि की बिजाई करने की सलाह दी जा जाती है। इसका बीज सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा गवार, मक्का, मूंग, कपास ,तिलहन आदि भी कम पानी में उगने वाली फसलें हैं।
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धान की सीधी बिजाई करने पर प्रति एकड़ चार हजार रुपये मिलते हैं किसान को
सरकार द्वारा पानी बचाने के लिए मेरा पानी मेरी विरासत योजना चलाई गई है। इसमें किसान द्वारा मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है। 31 जुलाई तक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। योजना में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए धान की खेती छोड़ दूसरी फसल उगाने या किसान द्वारा अपना खेत खाली छोड़ने की स्थिति में भी किसानों को सरकार द्वारा सात हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जानी है। इसके अलावा धान की सीधी बिजाई करने वाले किसानों को प्रति एकड़ चार हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की योजना है।


जिस क्षेत्र में पानी की कमी है या सूखे की स्थिति में सरसों की खेती भी एक विकल्प हो सकता है। इसमें बारानी क्षेत्र के किसान पूरे साल में एक ही फसल लेते हैं। बरसात के मौसम के बाद जमीन तैयार कर ली जाती है। उसके बाद सही समय पर कम नमी के बावजूद भी बिजाई करने से सरसों की फसल उगाई जा सकती है।
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संदीप नांदल, खंड कृषि अधिकारी
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