धान की कटाई में जुटे किसान। अमर उजाला
इस बार फसलों पर पहले मौसम की मार पड़ी और अब कटाई पर भी संकट आ गया है। मजदूरों की किल्लत के चलते धान की कटाई नहीं हो पा रही है। कटाई लेट होने से रबी सीजन की फसलों की बिजाई भी लेट होगी, जिससे उत्पादन कम होने की आशंका है। वहीं, जिले में धान का रकबा करीब 61 हजार हेक्टेयर है। इस साल सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश हुई है। इसके कारण जिले के ज्यादातर खेतों में अभी भी पानी भरा है। कृषि विभाग के अनुसार लगभग 95 प्रतिशत फसल ऐसी है जो खेतों में बिछी पड़ी है। ऐसी फसल की कटाई मजदूरों के बिना संभव नहीं है। लेकिन मजदूर हैं ही नहीं। बिहार में फिलहाल पंचायत चुनाव हो रहे हैं, जिस कारण ज्यादातर मजदूर घर जा चुके हैं। अभी इक्का-दुक्का मजदूर ही वापस लौटे हैं। इसके चलते धान की कटाई नहीं हो पा रही है। अभी तक सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत धान की कटाई ही हो पाई है। कुछ किसानों ने जलभराव वाले खेत में चलने वाली छोटी कंबाइन का प्रयोग किया। लेकिन जहां फसल बिछ गई है, वहां मजदूरों द्वारा ही कटाई हो सकती है। मजदूरों की किल्लत के चलते धान की कटाई पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की कटाई लेट होने से इस सीजन पर तो बुरा असर पड़ेगा ही, अगला सीजन भी प्रभावित होगा। अगर गेहूं की बिजाई लेट हुई तो उत्पादन घट जाएगा। गेहूं की अगेती फसलों के लिए बिजाई का आदर्श समय निकलना तय है। ऐसे में प्रतिदिन के हिसाब से उत्पादन पर असर पड़ेगा।