जाट आरक्षण आंदोलन के बाद हुए उपद्रव के कारण आईजी और दो डीएसपी के बाद डीसी डीके बेहेरा पर गाज गिर गई है। क्योंकि रोहतक से आंदोलन शुरू हुआ और यहां से उपद्रव भी शुरू हुआ था और उसे कंट्रोल करा पाने में डीसी पूरी तरह से नाकाम रहे थे। सीएम और उपद्रव जांच कमेटी के सामने भी डीसी पर लोगों ने खूब आरोप लगाए थे और उसी समय उनपर गाज गिरना तय माना जा रहा था। अब रोहतक के डीसी अतुल कुमार को बनाया गया है जो अभी तक महेन्द्रगढ़-नारनौल के डीसी थे।
हिसार में जाट आरक्षण आंदोलन शुरू जरूर हुआ था, लेकिन उसे सरकार ने किसी तरह खत्म करा दिया था। वहां के बाद आंदोलन की शुरूआत सांपला से हुई थी और यहां कई दिनों तक हाइवे को जाम रखा गया था। उस आंदोलन को कोई भी अधिकारी खत्म नहीं करा सका तो डीसी डीके बेहेरा वहां पहुंचे भी नहीं। वह आंदोलन धीरे-धीरे पूरे जिले में फैल गया था और उपद्रव की शुरूआत भी रोहतक से हुई।
उस समय भी पुलिस व प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ और उपद्रव को रोकने में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया। जिसमें आईजी श्रीकांत जाधव और डीएसपी अमित भाटिया के अलावा अमित दहिया पर पहले ही गाज गिर चुकी है। इस पूरे मामले में डीसी डीके बेहेरा पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा था। क्योंकि उपद्रव के बाद सीएम मनोहर लाल खट्टर यहां पहुंचे थे तो उनके सामने भी पीड़ितों ने डीसी पर जमकर आरोप लगाए थे।
इसके अलावा उपद्रव की जांच करने आए कमेटी प्रमुख आईपीएस प्रकाश सिंह के सामने भी लोगों का सबसे ज्यादा गुस्सा डीसी के खिलाफ ही निकला था। खुद कमेटी ने यह माना भी था कि प्रशासन की कहीं न कहीं लापरवाही रही थी, जिससे उपद्रव को शांत नहीं किया जा सका। यही कारण रहा कि डीसी डीके बेहेरा की जगह महेन्द्रगढ़-नारनौल के डीसी अतुल कुमार को यहां का कार्यभार सौंपा गया है।
डीसी अतुल कुमार के सामने होगी कई चुनौती
रोहतक के डीसी बनाए गए अतुल कुमार के सामने भी चुनौती कम नहीं होगी। क्योंकि जाट आरक्षण आंदोलन के बाद हुए उपद्रव के कारण जातीय खाई खुद गई है और उसे भरना किसी चुनौती से कम नहीं है। यहां सभी बिरादरी के लोग रहते है और उनमें भाईचारा कायम करने के बाद ही माहौल शांत माना जा सकता है। इसके अलावा पीड़ित व्यापारियों व उद्यमियों की समस्याओं का समाधान करना भी एक बड़ी चुनौती है। इन सभी के अलावा भी नये डीसी को कई चुनौतियों से जूझना पड़ेगा।