रोहतक। पितरों को मोक्ष दिलाने वाली इंदिरा एकादशी व्रत इस बार 28 सितंबर को मनाई जाएगी। पुराणों के अनुसार जितना पुण्य कन्यादान और हजारों सालों की तपस्या से मिलता है, उससे भी कई ज्यादा पुण्य इंदिरा एकादशी व्रत से मिलता है।
आचार्य मनोज मिश्रा ने बताया कि इंदिरा एकादशी व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ता है। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन व्रत रखने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही व्रत करने वाले व्यक्ति को मरने के बाद स्वर्ग लोक में स्थान मिलता है। इस दिन भगवान शालिग्राम की पूजा-अर्चना का विधान है। इंदिरा एकादशी का व्रत इस साल 28 सितंबर को रखा जाएगा। एकादशी तिथि का प्रारंभ 27 सितंबर 2024 को दोपहर 01:22 बजे से शुरू हो चुकी है और इसकी समाप्ति 28 सितंबर दोपहर 02:50 बजे पर होगी।
यह कथा है प्रचलित
इंदिरा एकादशी की पौराणिक कथा अनुसार सतयुग में इंद्रसेन नाम के एक राजा थे, जो माहिष्मती नाम के क्षेत्र में राज करते थे। इंद्रसेन भगवान विष्णु के परम भक्त थे। वे एक दिन जब किसी कामकाज में लगे थे, तब अचानक देवर्षि नारद उनकी राजसभा में पहुंचे। राजा ने देवर्षि का स्वागत करते हुए उनके आने का कारण पूछा।
देवर्षि नारद ने कहा कि कुछ दिन पहले जब वह यमलोक गए थे तो वहां उनकी मुलाकात राजा इंद्रसेन के पिता से हुई। उन्होंने अपने पुत्र राजा इंद्रसेन के लिए संदेश भेजा है कि एक बार किसी कारणवश उनसे एकादशी का व्रत भंग हो गया था। इसी पाप के कारण उन्हें अभी तक मुक्ति नहीं मिली है और उन्हें यमलोक में रहना पड़ रहा है। आगे देवर्षि नारद कहते हैं उन्होंने कहा कि मेरे पुत्र से कहिएगा कि यदि वो आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रखेंगे तो उन्हें यमलोक से मुक्ति मिल जाएगी।