हरियाणा के रोहतक में आईएमटी स्थित सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के हौद में गिरने से मारे गए अटायल निवासी रूपक व देवेंद्र का पोस्टमार्टम रविवार को छह घंटे तक अटका रहा। दोपहर दो बजे कंपनी द्वारा आश्रितों को 15-15 लाख रुपये देने पर दोनों पक्षों में सहमति बन सकी। इसके बाद पोस्टमार्टम हुआ और शाम पांच बजे गमगीन माहौल में दोनों युवकों का अंतिम संस्कार किया गया।
शनिवार को अटायल गांव निवासी सुरेंद्र उर्फ सिकंदर ने आईएमटी थाने में केस दर्ज कराया था कि उसका बड़ा बेटा देवेंद्र आईएमटी स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में माली की नौकरी करता था। जहां गांव का युवक 23 वर्षीय रूपक, प्रेम नगर निवासी नरेश, बोहर निवासी जयसिंह व अटायल निवासी कपिल हेल्पर की नौकरी करते थे।
आरोप लगाया कि प्लांट संचालन कंपनी के मैनेजर हिमांशु व सीवरेज लाइन इंचार्ज सुनील ने पहले रूपक व फिर देवेंद्र को जबरन बिना उपकरणों के हौद में उतार दिया, जहां जहरीली गैस के प्रभाव से दोनों की पानी में गिरने से मौत हो गई। पुलिस ने कंपनी के ठेकेदार, मैनेजर व सीवरेज इंचार्ज के खिलाफ गैर इरादतन हत्या व एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
रविवार सुबह 10 बजे जब पुलिस शवों का पोस्टमार्टम कराने लगी तो परिजनों ने सहमति नहीं दी। काफी संख्या में अटायल, खरावड़ व बलियाना के ग्रामीण परिजनों के समर्थन में पहुंच गए। दो बजे दोनों पक्षों में उस समय सहमति बन गई, जब कंपनी मृतकों के परिजनों को 15-15 लाख देने पर सहमत हो गई। इसके बाद तीन बजे शवों का पोस्टमार्टम हुआ।
करीब पांच बजे गांव में अंतिम संस्कार हो सका। मौके पर सांपला एएसपी मेधा भूषण, एसडीएम राकेश सैनी, आईएमटी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कैलाशचंद भी मौजूद रहे। साथ ही ग्रामीणों की तरफ से खरावड़ गांव के निवर्तमान सरपंच बिजेंद्र, अटायल गांव के निवर्तमान सरपंच सुखदेव, नगर निगम के पूर्व पार्षद राजेश देशवाल व खरावड़ निवासी धीरज, सुमित व वीरेंद्र स्वामी के अलावा सीटू नेता विनोद भी मौजूद रहे।
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कंपनी की तरफ से आश्रितों को 15-15 लाख रुपये दिए गए हैं। साथ ही सरकारी की योजना के तहत श्रम विभाग ईएसआईसी के तहत करीब सवा सात-सात लाख रुपये दिलवाएगा। इसके अलावा नियमों के तहत फैमिली पेंशन भी बनेगी।
- राकेश सैनी, एसडीएम रोहतक
आश्रितों को नौकरी व समझौते पर स्थिति साफ नहीं
ग्रामीणों ने मांग रखी थी कि मृतकों के परिवारों को भी एक-एक नौकरी दी जाए। यह नौकरी अब प्रशासन कौशल योजना के तहत दिलवाएगा या कंपनी देगी, यह साफ नहीं हो सका है। दूसरा, पुलिस द्वारा दर्ज किया गया केस चलेगा या समझौता होगा, इस पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
कंपनी ने 15-15 लाख रुपये दिए हैं। बाकी केस को लेकर क्या रहेगा, परिवार व ग्रामीणों के साथ मिलकर निर्णय लूंगा। अभी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हूं। -
सुरेंद्र, मृतक देवेंद्र के पिता