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Rohtak News: जाट संस्था के सदस्यों को पहचान पत्र आवंटित, अब चुनाव तिथि की घोषणा का इंतजार

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रोहतक। जाट शिक्षण संस्था के पिछले आठ वर्षों से अटके चुनावों की राह और बेहतर बन गई है। सरकार की ओर से एडीसी महेश कुमार को चुनाव अधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद संस्था सदस्यों के पहचान पत्र बनाए दिए गए हैं। ये पहचान पत्र उन्हें वितरित भी किए जा चुके हैं। अब सभी चुनाव तिथि की घोषणा होने का इंतजार है। इस बारे में अधिकारी जल्दी ही घोषणा कर सकते हैं।
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जाट संस्था में कार्यरत कर्मियों और सामाजिक व्यक्तियों के सहयोग से आजीवन सदस्यों के 8000 से अधिक पहचान पत्र पारदर्शी और नियमानुसार बनाए गए हैं। इनके वितरण के लिए 22 से 25 नवंबर तक संस्था के विभिन्न संस्थानों में काउंटर बनाए गए। पहचान पत्र बांटने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की गई। पहले चरण में आजीवन सदस्यों ने संस्था में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर पहचान पत्र प्राप्त किए। द्वितीय चरण में दूर दराज के क्षेत्रों के आजीवन सदस्यों के पहचान पत्र स्पीड पोस्ट व रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजे गए। तीसरे चरण में बचे हुए पहचान पत्रों को संस्था में कार्यरत नियमित कर्मियों की ड्यूटी तय कर उन तक पहुंचाना सुनिश्चित किया गया। पहचान पत्र वितरण कार्य पूरा हो चुका है। अब भी कोई आजीवन सदस्य तैयार पहचान पत्र प्राप्त नहीं कर पाया है तो वह संस्था कार्यालय में संपर्क कर सकता है। यह पहचान पत्र मतदान के लिए अनिवार्य है। इसी कड़ी में संस्था कर्मियों के सहयोग से वरिष्ठ आजीवन सदस्य 94 वर्षीय राय सिंह मान और 90 वर्षीय मास्टर रामधारी सिंह को उनके पहचान पत्र व्यक्तिगत तौर पर जाकर सौंपे।

2015 में भंग हो गई थी जाट संस्था की कार्यकारिणी
जाट संस्था की अंतिम कार्यकारिणी वर्ष 2015 तक रही। इस वर्ष संस्था सदस्यों ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकार से शिकायतें कीं। इसके चलते सरकार ने कार्यकारिणी को भंग कर दिया। इसके बाद नई कार्यकारिणी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। चुनावी शेड्यूल के अनुसार नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई। इसी दौरान फोटो पहचान पत्र को लेकर मुद्दा उठा। विवाद इतना बढ़ा कि चुनावी प्रक्रिया रोकनी पड़ी। कुछ सदस्यों ने न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद से मामला अटका हुआ है। हालांकि किसी भी संस्था में नियमानुसार अधिकतम पांच वर्ष का प्रशासक कार्यकाल पूरा हो सकता है। इसके बाद बावजूद संस्था की जिम्मेदारी अब भी प्रशासक के हाथों में है।
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यह है जाट संस्था का इतिहास
जाट शिक्षण संस्था की स्थापना वर्ष 1913 में हुई थी। स्थापना के बाद कई दशक तक सर्वसम्मति से संस्था का प्रधान चुना जाता रहा। कुछ दिनों तक अस्थायी प्रधान भी रहे। इसके बाद सितंबर 1913 में चौधरी देवी सिंह को सर्वसम्मति से प्रधान बनाया गया। संस्था में वोटों से होने वाला पहला चुनाव वर्ष 1990 में हुआ। वर्ष 2015 के बाद से चुनाव नहीं हुए।

संस्था के 15500 सदस्य चुनेंगे 105 कॉलेजियम सदस्य
जाट संस्था में लगभग 15500 सदस्य हैं। यही सदस्य नई कार्यकारिणी का चयन करेंगे। इसके लिए नए फर्म एंड सोसाइटी एक्ट के तहत 105 कॉलेजियम सदस्य चुने जाएंगे। ये 105 सदस्य गवर्निंग बॉडी का चुनाव करेंगे। इसमें प्रधान समेत अन्य पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्य शामिल हैं।

वर्जन
संस्था चुनाव को लेकर प्रयास जारी हैं। चुनाव जल्द कराए जाएंगे। संस्था सदस्यों के पहचान पत्र उन्हें पहुंचा दिए गए हैं। सरकार ने चुनाव अधिकारी के रूप में एडीसी को नियुक्त किया है। संस्था चुनाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। जल्द ही चुनाव की तिथि घोषित कर दी जाएगी।
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- डॉ. नवनीत अहलावत, ओएसडी, प्रशासक, जाट संस्था।
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