रोहतक। पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के दोषी पति को एएसजे डॉक्टर गगनगीत कौर की अदालत ने सात साल कैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। साथ ही अदालत ने जिला विधिक प्राधिकरण को महिला के तीनों बच्चों की आर्थिक सहायता के लिए लिखा है।
पीड़ित पक्ष के वकील सुशील पांचाल ने बताया कि 2019 में सदर थाने में एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उसने अपनी बेटी का विवाह 2000 में रोहतक जिले के एक गांव में हुआ था। उसकी बेटी के तीन बच्चे हैं। दो लड़की व एक लड़का है। उसकी बेटी से उसका पति अक्सर मारपीट करता था। नौ सितंबर 2019 में उसकी बेटी का फोन आया। बोली, वह पति के जुल्मों से तंग आ चुकी है। इस पर उसने कहा कि वह जल्द गांव पहुंच रहा है। गांव पहुंचा तो पता चला कि उसकी बेटी ने जहरीले पदार्थ निगल लिया। उसका पति उसे पीजीआई में छोड़कर फरार हो गया, जहां उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया था। तभी से जिला अदालत में आरोपी के खिलाफ केस की सुनवाई चल रही थी। नाबालिग बेटी ने पिता के खिलाफ गवाही दी थी। तीन मार्च को एडीजे डॉक्टर गगनगीत कौर की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया था, जिसे सोमवार को सात साल कैद की सजा सुनाई गई।