अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रदेश के सबसे बड़े खेल मैदान राजीव गांधी खेल परिसर के हालात खस्ता बने हुए हैं। यहां के ज्यादातर खेल मैदान जर्जर हो चुके हैं। कहीं गड्ढे बने है तो कहीं मैदान ऊबड़-खाबड़ हो गए हैं।
अमर उजाला ने खेल परिसर की व्यवस्था जानने के लिए वहां का दौरा किया तो यह सच सामने आया है।
खेल मैदान असुविधाओं के कारण जर्जर हाल में हैं। इन पर खिलाड़ी अपनी तैयारी सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। स्टेडियम में रोजाना बड़ी संख्या में खिलाड़ी अभ्यास कर अपना कौशल निखारने आते हैं। मैदान में चारों ओर बड़ी बड़ी घास खड़ी हैं। सुरक्षा के लिए लगाई जालियां टूटी व फटी हुई हैं। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। झाड़ियों में छिपे जहरीले प्राणी जान का जोखिम और बढ़ा देते हैं। स्टेडियम परिसर में पेयजल सुविधा नहीं है। पीने के लिए पानी खिलाड़ियों को साथ लाना पड़ता है।
खेल के मैदान असमतल हैं। इन पर खेलने से अक्सर चोट लगने की समस्या का सामना करना पड़ता है। चोट लगने से खेल से भी दूर होना पड़ता है। चोट का खेल पर भी प्रभाव पड़ता है। - जतिन, खिलाड़ी।
मैदान पर अच्छे से घास न होकर कई जगह गड्ढे बने हैं। खेलते समय मिट्टी उड़ती रहती है। मैदान की देखरेख समय पर नहीं होती। खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। मैदान की हालत खराब हो चुकी हैं। - नमन, खिलाड़ी।
आवारा कुत्ते खेल मैदान में घूमते रहते हैं। इनसे खिलाड़ियों को खतरा बना रहता है। बारिश के समय मैदान पर पानी भर जाता है। इससे अभ्यास करना नामुमकिन हो जाता है। - पुनीत, खिलाड़ी।
खेल मैदान में गड्ढे बने हैं। इन पर पैर फिसलकर चोटिल होने का खतरा बना रहता है। मैदान की देखरेख अच्छे से नहीं हो रही है। इस कारण नहीं हाल दयनीय है। यहां पीने के पानी की व्यवस्था चरमराई हुई है। - चिराग, खिलाड़ी।