लो गृहमंत्री जी, पानी के सैंपल फेल हो गए हैं, अब करो कार्रवाई। वार्ड 16 की निगम पार्षद डिंपल जैन की ओर से 12 अगस्त को जनपरिवेदना समिति की बैठक में की गई पेयजल संबंधी शिकायत सत्य पाई गई है। इसमें पार्षद ने जनता की ओर से आवाज उठाई थी कि उनके वार्ड में पेयजल व सीवरेज संबंधी समस्याएं हैं। यही नहीं गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की चेतावनी के बावजूद यहां अभी भी हालात जस के तस हैं। न शहर की पेयजल व्यवस्था में सुधार हुआ है और न ही जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की कार्यप्रणाली में। इसका खुलासा हुआ है एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिए गए 13 में सात पेयजल के सैंपलों की फेल रिपोर्टों में।
सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से जारी पेयजल की जांच रिपोर्ट ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के साफ पेयजल सप्लाई करने के दावों की पोल खोल दी है। जांच में रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थल का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। सिविल सर्जन रोहतक ने यह रिपोर्ट जिला उपायुक्त को भेजी है, ताकि वह संबंधित विभाग को व्यवस्था सुधारने के लिए कहें। सिविल सर्जन कार्यालय के निर्देशों पर रेलवे स्टेशन प्याऊ, बूस्टर गोहाना अड्डा, संत नगर, जनता कॉलोनी, प्रेम सेवा दल के सैंपल भरे थे। फेल सैंपलों की जांच रिपोर्ट सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला की ओर से उपायुक्त रोहतक को भेजी गई है। जांच रिपोर्ट में पेयजल में हानिकारक बैक्टीरिया मिले हैं। विभाग के अनुसार पेयजल पूरी तरह साफ नहीं है। इसमें सही तरीके से क्लोरीन नहीं मिला है। बरसात के दिनों में पेयजल सप्लाई का सही तरीके से क्लोरीनाइज होना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर पेट में संक्रमण संबंधी समस्या हो जाती है।
खुद की लैब में नहीं करते सैंपल फेल
हैरानी की बात है कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की स्वयं की लैब है। इसमें पेयजल की जांच होती है। इसके बावजूद बूस्टर गोहाना अड्डा का सैंपल फेल पाया जाना सवाल उठाता है। विभाग अपनी जांच में अधिकांश जांच रिपोर्ट को पास दिखाता है, जबकि हेल्थ विभाग की जांच में अधिकांश रिपोर्ट फेल पाई गई हैं। गौरतलब है कि हेल्थ विभाग हर माह पेयजल के सैंपल भरता है और इनकी जांच रिपोर्ट प्रशासन को भेजता है।
गलत फहमी में हैं अधिकारी, छह माह से है पेयजल समस्या
वार्ड 16 की नगर निगम पार्षद डिंपल जैन ने बताया कि जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गलतफहमी में हैं। उनके क्षेत्र में छह माह से पेयजल समस्या है। इससे करीब 40 हजार की आबादी प्रभावित हो रही है। उन्होंने गृहमंत्री के सामने पेयजल व सीवर की शिकायत जिला परिवेदना समिति की बैठक में की थी। इस पर मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को सैंपल जांच करवाने के आदेश दिए थे। कहा गया था कि यदि लापरवाही मिली तो कार्रवाई होगी। जो सैंपल फेल मिले हैं वह मेरे क्षेत्र में हैं। चार से पांच रिपोर्ट अभी आनी है। विभाग हर दूसरे दिन एक गड्ढा करता है और तीन दिन बंद कर देता है। पेयजल की समस्या का समाधान नहीं होता। यह सिर्फ बिल बनाने का माध्यम हो गया है। विभाग छह माह से सिर्फ गलियों में गड्ढे कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग शिकायत के आधार पर व अपनी ओर से भी पेयजल सैंपलों की जांच करता रहता है। फेल जांच रिपोर्ट को उपायुक्त व संबंधित विभाग को भेजा जाता है, ताकि व्यवस्था सही हो सके। पेयजल सप्लाई दूषित नहीं होनी चाहिए, इससे कई बीमारियां हो सकती हैं। -डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन।