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Rohtak News: देर रात भोजन की आदत से बढ़ रहे सिरदर्द के रोगी

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डॉ. विपिन नैन, चिकित्सक मानसिक स्वास्थ्य, नागरिक अस्पताल। संवाद
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रोहतक। दफ्तरों में अत्यधिक काम या फिर उच्च शिक्षा व काम न मिलने का दबाव युवाओं को मानसिक तनाव की ओर लेकर जा रहा है। रोज एक जैसी कार्यशैली व दबाव के कारण उन्हें रात में नींद नहीं आती है। देर रात भोजन करने के कारण पाचन क्रिया खराब हो रही है। पूरा शरीर का तंत्र हिला हुआ रहता है। नींद लेने से पहले दिनचर्या का ख्याल आ जाने से उनकी नींद भी पूरी नहीं हो पा रही है। इसके कारण सिर दर्द की समस्या बढ़ गई है। इन्हीं दैनिक समस्याओं से लोगों को जागरूक करने लिए प्रत्येक वर्ष 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
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उर्जा से भरपूर चीजों को सेवन करें
मनोचिकित्सकों के अनुसार, स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए दिन की शुरुआत उर्जावान खाद्य पदार्थों का करना चाहिए। रात में सोने से पहले कच्ची मूंगफली को भिगो दें। सुबह इसे दूध व केले साथ सेवन करें। उर्जा बनी रहेगी। उर्जा रहेगी तो थकान नहीं होगा। थकान नहीं होगी तो तनाव भी नहीं होगा। ऐसे ही दोपहर के भोजन में दाल को शामिल करें। रात में हरी सब्जी (तैलीय न हो), सलाद, ज्यादा सेवन करें। आहार में इन्हें शामिल करने से शरीर में सही मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, खनिज मिल जाते हैं। इसके अलावा शाम को कॉफी-चाय लेने से परहेज करें।



केस : 1
समीर कुमार (40) एक अकाउंटेंट हैं। सुबह 10 से 4 बजे तक दफ्तर का समय है। लेकिन, ज्यादातर कार्य शाम को ऑफिस टाइम के बाद शुरू होता है। इसके कारण वह रात का भोजन भी ठीक से नहीं कर पाते हैं। दिनभर सिर भारी और थकावट सा बना रहता है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में वह नींद न आने और सिरदर्द की समस्या लेकर इलाज के लिए पहुंचे।
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केस : 2
20 वर्षीय अनुभव नीट की तैयारी कर रहे हैं। वह क्लास में पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है। उसे पिछले एक माह से सिर में दर्द बना हुआ है। पहले वह बैडमिंटन भी खेलता था, लेकिन पढ़ाई के कारण वह भी छूट गया है। बाजार से मंगाकर भोजन का सेवन करता है। मोटापा बढ़ रहा है। बीपी हाई है।

वर्जन
जिंदगी में महत्वाकांक्षा होनी चाहिए। लेकिन, यह स्वयं को सजा देकर नहीं पाई जा सकती। अपने शौक (हॉबी) के लिए रोज वक्त निकालना चाहिए। परिवार के साथ टहलने जाएं। रात में भोजन जितना जल्दी हो सके, करें। भोजन के बाद 15 मिनट स्थिर बैठे रहें। इसके बाद सैर पर जाएं। भोजन और बेड पर सोने जाने के बीच दो घंटे का कम से कम फासला होना ही चाहिए। यहां आने वाले रोगियों में खासकर सिरदर्द के में एक चीज सामान्य है, वह देर रात भोजन करने की आदत है। मरीजों को उनकी समस्या के अनुसार दवा प्रदान की जाती है। उन्हें परिवार के साथ वक्त गुजारने के भी सलाह दी जाती है।
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-डॉ. विपिन नैन, चिकित्सक मानसिक स्वास्थ्य, नागरिक अस्पताल
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