हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) ने नए सत्र के लिए लागू नए कोर्स और नई फीस पर उभरा विवाद को शांत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। इसके तहत विश्वविद्यालय ने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रमों में फीस संरचना में संशोधन का निर्णय लिया है।
फीस पूर्ववर्ती पंचवर्षीय समेकित पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष की फीस के समान ही रखी जाएगी। छात्र संगठनों ने इसे संयुक्त छात्र संगठन के बैनर तले किए गए संघर्ष की आधी जीत बताया है। विवि में चार वर्षीय स्नातक कोर्स और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति वापस कराने पर यह जीत पूरी होगी।
एमडीयू में नए सत्र से नए कोर्स विद्यार्थियों के लिए शुरू किए गए हैं। इनकी फीस भी नए सिरे से तय की गई थी। यह फीस 30660 रुपये से 611650 रुपये वार्षिक थी। इसे लेकर विद्यार्थियों में रोष था। एनईपी 2020, इसके तहत लागू नए कोर्स व नई फीस का विद्यार्थी लगातार विरोध कर रहे थे।
अमर उजाला ने भी इस मुद्दे को विद्यार्थी हित में प्रमुखता से उठाया। इसके चलते एमडीयू प्रशासन ने डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एएस मान की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। इसमें कुलसचिव प्रो. गुलशन तनेजा, डीन डीएसडब्ल्यू प्रो. रणदीप राणा व वित्त अधिकारी मुकेश भट्ट शामिल रहे। इस समिति ने विभिन्न छात्र संगठनों से प्राप्त विभिन्न अभ्यावेदनों पर विचार किया।
समिति ने 13 जून को उच्च्तर शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा महानिदेशक की अध्यक्षता में ऑनलाइन बैठक की। इसके साथ 19 जून को एसीएस, उच्च शिक्षा की ओर से बुलाई गई कुलपतियों की बैठक में विचार-विमर्श किया गया। इसे को भी ध्यान में रखा। समिति ने उपरोक्त बैठकों से निकले निर्देशों के अनुरूप विभिन्न कार्यक्रमों की शुल्क संरचना पर फिर से विचार किया। विचार-विमर्श के बाद, संशोधित शुल्क संरचना प्रस्तावित की। इस संंबंध में विवि ने अपनी वेबसाइट के साथ छात्र संगठनों को भी सूचना जारी कर दी है।
विवि प्रबंधन ने विद्यार्थी हित देखते हुए व अधिकारियों से हुई चर्चा के आधार पर फीस कम करने का फैसला लिया है। नई फीस की सूची जारी कर दी गई है। विवि के पुराने पंच वर्षीय कोर्स के प्रथम वर्ष जितनी फीस चार वर्षीय कोर्स के प्रथम वर्ष के लिए निर्धारित की गई है। यह लगभग पुरानी फीस जितनी ही है। इससे विद्यार्थियों को राहत मिलेगी।
-प्रो. गुलशन तनेजा, कुलसचिव, एमडीयू।
ट्यूशन फीस 440 रुपये व विकास शुल्क 6050 रुपये
एमडीयू ने छात्र संगठनों के संघर्ष व उनकी लगातार उठाई जा रही मांग को देखते हुए फीस कम कर दी है। इसके तहत अब चार वर्षीय स्नातक कोर्स की वार्षिक फीस 9542 रुपये रहेगी। इसे पहले 40 हजार रुपये निर्धारित किया गया था जबकि पुराने पांच वर्षीय कोर्स में यह शुल्क 8522 रुपये था। अब नई फीस के तहत दाखिला शुल्क 50 रुपये, ट्यूशन फीस 440 रुपये, एकीकृत शुल्क 240 रुपये, विकास शुल्क 6050 रुपये, सुरक्षा राशि 500 रुपये, पाठ्यक्रम शुल्क 100 रुपये, ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (जीआईएस) 48, अन्य शुल्क 1454 रुपये, परीक्षा शुल्क सेमेस्टर अनुसार 660 रुपये तय की गई है।
पुरानी फीस
पहले नई फीस में यह शुल्क अधिक था। इसके तहत दाखिला शुल्क 100 रुपये, ट्यूशन फीस 8000 रुपये, एकिकृत शुल्क 240 रुपये, विकास शुल्क 18668 रुपये, पाठ्यक्रम शुल्क 1000, रुपये, ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (जीआईएस) 48, अन्य शुल्क 1284 रुपये, वार्षिक परीक्षा शुल्क 1320 रुपये तय की गई है। यह कुल राशि चार वर्षीय स्नातक अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, लोक प्रशासन, संस्कृत व इतिहास विषय के लिए 30660 रुपये बनती है जबकि पहले पंच वर्षीय कोर्स में यह कुल 8522 रुपये थी।
एमडीयू में चार वर्षीय स्नातक कोर्सों की नई फीस का ब्योरा (रुपये में)
कोर्स अब पहले
- अंग्रेजी 9542 30660
- अर्थशास्त्र 9542 30660
- लोक प्रशासन 9542 30660
- संस्कृत 9542 30660
- इतिहास 9542 30660
- जैनेटिक्स 9542 40660
- गणित 9622 40660
- सांख्यिकी 9542 40660
- कॉमर्स 9542 40660
- फाइन आर्ट्स 17752 40660
- व्यवसाय प्रबंधन 27502 61650
छात्र संगठनों के प्रदर्शन की चेतावनी देने के बाद एमडीयू प्रशासन ने पुलिस अधिकारियों के माध्यम से नई फीस का स्ट्रक्चर मुहैया कराया है। एमडीयू में स्नातक कोर्सों की पांच गुना फीस वृद्धि वापस कर ली गई है। छात्र संगठनों का आंदोलन रंग लाया और प्रशासन को आंदोलन के आगे झुकना पड़ा। अभी चार वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स व राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। संयुक्त छात्र संघर्ष समिति की बैठक में लिए जाने वाला अंतिम निर्णय ही मान्य होगा। रविवार का प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया है। -दीपक धनखड़, पूर्व अध्यक्ष, छात्र युवा संघर्ष समिति।
एमडीयू ने नए सत्र में नए कोर्स व नई फीस लागू की थी। नई फीस बेहद ज्यादा थी। इसके अलावा पांच वर्षीय कोर्स समाप्त कर चार वर्षीय कोर्स शुरू करना और एनईपी 2020 लागू की गई। इनका सभी छात्र संगठनों ने संयुक्त छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले विरोध किया। इसके चलते विवि प्रशासन ने फीस कम करने का फैसला लिया है। अभी आधी जीत हुई है। आधी बाकी है। -उमेश कुमार, सचिव, ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन।